दक्षिण दिल्ली की रियल एस्टेट क्षमता 5.65 लाख करोड़ रुपये तक पहुंची : रिपोर्ट

नई दिल्ली, 26 फरवरी . देश के सबसे पॉश इलाकों में से एक दक्षिण दिल्ली की रियल एस्टेट क्षमता अब 5.65 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है. बुधवार को आई एक लेटेस्ट रिपोर्ट में कहा गया है कि दक्षिण दिल्ली उन घरों के लिए एक आइडियल लोकेशन बन गई है, जो एक्सक्लूसिव और लग्जरी लिविंग एक्सपीरियंस देते हैं.

कैटेगरी-II रियल एस्टेट केंद्रित अल्टरनेटिव इंवेस्टमेंट फंड, गोल्डन ग्रोथ फंड (जीजीएफ) की एक रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण दिल्ली में 13 कैटेगरी-ए कॉलोनियों की रियल एस्टेट क्षमता 2.14 लाख करोड़ रुपये की है, जो लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा है.

27 कैटेगरी-बी कॉलोनियों की रियल एस्टेट क्षमता 3.21 लाख करोड़ रुपये की है, जो लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा है.

कैटेगरी ए कॉलोनियों में भूखंडों की औसत कीमत 7-15 लाख रुपये प्रति वर्ग गज है, जबकि कैटेगरी बी कॉलोनियों की कीमत 6-12 लाख रुपये प्रति वर्ग गज है.

रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण दिल्ली में 18,446 प्लॉट 42 कैटेगरी ए, बी और सी कॉलोनियों में उपलब्ध हैं, जिनका आकार 125 वर्ग गज से लेकर 1,750 वर्ग गज तक है और इनकी औसत कीमत 6-15 लाख रुपये प्रति वर्ग गज है.

दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) ने दिल्ली की सभी कॉलोनियों को आठ कैटेगरी – ए, बी, सी, डी, ई, एफ, जी और एच में बांटा है.

कैटेगरी ए और बी सबसे एक्सक्लूसिव लोकेशन हैं, जो दक्षिण दिल्ली में स्थित हैं. सर्किल रेट्स, प्रॉपर्टी टैक्स रेट और प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन के लिए स्टैम्प ड्यूटी चार्ज इन कैटेगरी पर आधारित हैं.

कैटेगरी ए की 13 कॉलोनियों में करीब 3,704 प्लॉट उपलब्ध हैं, जिनका आकार 200 वर्ग गज से लेकर 1,200 वर्ग गज तक है और इनकी औसत कीमत 7 लाख रुपये प्रति वर्ग गज से लेकर 15 लाख रुपये प्रति वर्ग गज है.

रिपोर्ट में बताया गया है कि 27 कैटेगरी बी कॉलोनियों में लगभग 12,720 प्लॉट उपलब्ध हैं, जिनका आकार 125 वर्ग गज से लेकर 1,750 वर्ग गज तक है, जिनकी औसत कीमत 6 लाख रुपये प्रति वर्ग गज से लेकर 12 लाख रुपये प्रति वर्ग गज है.

गोल्डन ग्रोथ फंड के सीईओ अंकुर जालान के अनुसार, दक्षिण दिल्ली में मुख्य रूप से धनी वर्ग रहता है, जिसमें व्यवसायी, वकील और वेतनभोगी पेशेवर शामिल हैं, जिन्हें आलीशान फ्लोर और विला पसंद हैं.

एचएनआई, एनआरआई और फैमिली ऑफिस, जो पहले अनुपालन और सुरक्षा के बिना स्थानीय संपत्तियों में निवेश करते थे, अब वैकल्पिक निवेश फंड (एआईएफ) में निवेश कर रहे हैं, जो इन कॉलोनियों में निवेश करते हैं.

सेबी के हालिया आंकड़ों से पता चलता है कि रियल एस्टेट सेक्टर ने एआईएफ से 75,500 करोड़ रुपये का निवेश दर्ज करवाया है, जो सभी क्षेत्रों में सबसे अधिक है, जिसकी हिस्सेदारी 17 प्रतिशत है.

जालान ने कहा, “निवेश की सुरक्षा और संपत्ति के रखरखाव की चिंता किए बिना 18-20 प्रतिशत तक के रिटर्न के साथ, एआईएफ ने इन निवेशकों के लिए एक नया रास्ता खोल दिया है.”

एसकेटी/