Sunday , 6 December 2020

स्वतंत्रता संग्राम सेनानी खान मीर के पुत्र हैं शाहरुख

(लेखक – के विक्रम राव/ )
खान मीर उस काल में एक प्रमुख स्वाधीनता सेनानी थे वे दो बार ब्रिटिश जेल में कैद रहे. इनके गुरु थे सीमांत गांधी. मीर साहब का पुत्र है शाहरूख खान उर्फ बालिवुड का ”किंग खान”. वे नामी वकील थे, कंचनजंगा पर्वतमाला पर चढ़ चुके हैं. लम्बे कद के मीर साहब को फिल्म ‘मुगले आजम’ के निदेशक के.आसिफ ने राजा मान सिंह की भूमिका की पेशकश की थी पर उन्होंने इंकार कर दिया. तब अभिनेता मुराद (रजा के पिता) को वह दी गई. मीर साहब फिल्म को नौटंकी मानते थे. हालांकि इसी नौटंकी का नामी कलाकार उनके बेटे शाहरुख खान हो गये है. नेहरू सरकार ने मीर साहब को स्वाधीनता सेनानी होने के नाते एक दुकान आवंटित की थीं. वे दिल्ली में 19 सितम्बर 1981 तक जीवित थे.

इन ताज मोहम्मद मीर का जीवन का सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रवादी और भारत-हितैषी कार्यक्षेत्र पेशावर था. उनके भाई गुलाम मोहम्मद गामा (शाहरुख खां के सगे चाचा) थे तब की राष्टवादी घटना है. उसी दौर में पाकिस्तान वाली मांग के अभियान में मोहम्मद अली जिन्ना पेशावर आ रहे थे. वे जोशखरोश से भारतीय मुसलमानों के लिए दारूल-इस्लाम के नाम पर पाकिस्तान हेतु भारतव्यापी जद्दोजहद चला रहे थे. इसी के लिए जिन्ना पेशावर यात्रा पर भी आये. उस दिन ताज मोहम्मद मीर और भाई मोहम्मद अली गामा ने सारे पेशावर में पोस्टर लगवा दिये कि अकीदतमंद के सरबराह मियां मोहम्मद अली जिन्ना दोपहर के दो बजे शाहजहानी (मस्जिद मस्जिद मोहम्मद खान) में पधार कर नमाज अता फरमायेंगे. हजारों नमाजी मस्जिद में जमा हो गये. इधर जिन्ना समझ गये कि कुछ शरारतियों की यह खुराफात है. जिन्ना ने न कभी नमाज अता की, न कोई कुरान की आयात उन्हें याद थी. न किसी मजहबी रस्म का इल्म था. इसी वजह से मोहम्मद अली जिन्ना पेशावर के अपने गेस्ट हाउस में ही बैठे रहे. मस्जिद गये ही नहीं.

उधर मस्जिद में मियां गामा ने अपने लोगों को नमाजियों की भीड़ में पैठे रहने को कहा. ढाई बजे गये तो भीड़ ने ”जिन्ना साहब आओं” के सूत्र पुकारे. जब जिन्ना नहीं आये तो भीड़ उनको गाली देते मस्जिद से चली गयी. खबर खूब छपी. इस घटना द्वारा शाहरुख के वालिद ताज मोहम्मद मीर तथा चाचा गामा ने दिखा दिया कि मुस्लिम लीग के अध्यक्ष और मुसलमानों के कायदे-आजम का दावा ठोकने वाले ढोंगी है. खुदा की इबाहतगाह से साफ कन्नी काट गये. भारत भर में जिन्ना की जोरदार फजीहत हुई (हिन्दुस्तान टाइम्स, नई दिल्ली (New Delhi), में चार कालम की हेडलाइन का फीचर) छपी.

फिल्म दर्शकों में सांप्रदायिकता-विरोधी लोग किंग खान पर बहुत नाज करते हैं कि अन्य खान अभिनेता की तुलना में वे सेक्युलर है, स्वाधीनता सेनानी, जिन्ना—विरोधी और देशभक्त ताज मोहम्मद मीर साहब के आत्मज है. ऐसे ही मुसलमान भारत के गौरव हैं.