Tuesday , 27 October 2020

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डॉ. हरिसिंह का निधन, बेबाकी के युग का अंत

-कांग्रेस और बीजेपी नेताओं की तीन- तीन पीढ़ियों के साथ किया काम

जयपुर (jaipur) . कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डॉ. हरिसिंह का जयपुर (jaipur) के ईएचसीसी अस्पताल में निधन हो गया. सीएम अशोक गहलोत (Ashok Gehlot), पूर्व सीएम वसुंधरा राजे, कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया सहित कई नेताओं ने डॉ. हरिसिंह के निधन पर गहरा शोक जताया है. डॉ. हरिसिंह के निधन से कांग्रेस में बेबाकी के एक युग का अंत हो गया है. जिस बेबाकी और सपाट तरीके से हरिसिंह अपनी बात रखते थे, उतना साहस अब के नेताओं में नहीं देखने को मिलता है. बेबाकी और खुलापन डॉ. हरिसिंह की खामी और खूबी दोनों रही.

बेबाकी से बोलने के कारण उन्हें राजनीति में नुकसान उठाना पड़ा. और उनके चुनाव हारने के पीछे भी उनकी बेबाकी ही बाधा बन गई, लेकिन नुकसान के बावजूद अंदाज बेबाक ही रहा. डॉ. हरिसिंह जिस सपाट और तीखे अंदाज में बयान देते थे वह साफगोई आज के नेताओं में दुर्लभ है. हरिसिंह उस पुरानी पीढ़ी के नेताओं में से थे, जिन्होंने अंग्रेजी राज और सामंती व्यवस्था का दौर भी देखा तो आजाद भारत में आकार लेती और फिर फलती फूलती एक नई राजनीतिक व्यवस्था के साझेदार भी बने. उन्होंने कांग्रेस और बीजेपी नेताओं की तीन- तीन पीढ़ियों के साथ काम किया. इतने अनुभवों के बावजूद हरिसिंह से बेबाकी और बागी तेवर नहीं छूटे. कांग्रेस में रहते हुए अपनी ही पार्टी के मुख्यमंत्री (Chief Minister) और प्रदेशाध्यक्ष को क्रमश: धनानंद और जर- खरीद गुलाम तक बता दिया था.

झुंझुनू के कैरू गांव में 6 जुलाई 1936 को जन्मे डॉ. हरिसिंह का एक लंबा और उतार- चढ़ाव भरा राजनीतिक सफर रहा है. आपातकाल के बाद हुए चुनावों में 1977 में पहली बार जनता दल से विधायक बने, भैरोसिंह शेखावत के नेतृत्व में बनी पहली गैर कांग्रेसी सरकार (Government) में डॉ. हरिसिंह जलदाय मंत्री रहे. फुलेरा से तीन बार विधायक और सीकर से एक बार सांसद (Member of parliament) रहे. 1977 से 1985, 1989 से 91 और 1993 से 1996 तक फुलेरा से विधायक रहे. 1987 से 1989 तक फुलरा पंचायत समिति के प्रधान भी रहे. 1996 में सीकर से सांसद (Member of parliament) बने. वहीं, कांग्रेस में प्रदेश महासचिव और उपाध्यक्ष रहे. पर मतभेदों के चलते 25 अक्टूबर 2011 को कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था. बाद में 27 अक्टूबर 2016 को कांग्रेस में वापसी की. 2016 में घर वापसी के बाद से पार्टी में कोई पद नहीं मिला था. डॉ. हरिसिंह की मेडिकल क्षेत्र में अच्छी प्रतिष्ठा थी. वे एककुशल सर्जन थे. 1966 में वे इंग्लैंड के प्रतिष्ठित रॉयल कॉलेज ऑफ सर्जन से एफआरसीएस करने वाले प्रदेश के गिने चुने डॉक्टर्स में शुमार थे.