Saturday , 28 November 2020

समलैंगिक विवाह को मंजूरी देने की मांग पर केंद्र से जवाब मांगा


नई दिल्ली (New Delhi) . हिंदू विवाह कानून और विशेष विवाह कानून के तहत समलैंगिक विवाह को मान्यता देने की मांग पर उच्च न्यायालय ने गुरुवार (Thursday) को केंद्र सरकार (Central Government)(Central Government) से जवाब मांगा है. न्यायालय ने इस मांग को लेकर दाखिल जनहित याचिकाओं पर विचार करते हुए यह आदेश दिया है. जस्टिस राजीव सहाय एंडलॉ और आशा मेनन की पीठ ने सरकार को नोटिस जारी करते हुए 4 सप्ताह के भीतर हलफनामा दाखिल कर जवाब देने को कहा है.

याचिकाकर्ता ने याचिका में कहा है कि समलैंगिक संबंधों को अपराध की श्रेणी से बाहर रखने के सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बावजूद समलैंगिक जोड़ों के बीच विवाह संभव नहीं हो पा रहा है. इससे पहले भी उच्च न्यायालय ने 14 अक्तूबर को विशेष विवाह कानून के तहत शादी की अनुमति देने की मांग को लेकर दो महिलाओं द्वारा दाखिल याचिका पर केंद्र सरकार (Central Government)(Central Government) से जवाब मांगा था. पिछले आठ साल से साथ रह रहीं दोनों महिलाओं ने कहा था कि वे एक दूसरे से प्यार करती हैं और साथ मिलकर जीवन में उतार-चढ़ाव का सामना कर रही हैं.

उन्होंने कालकाजी के एसडीएम को कानून के तहत उनका विवाह पंजीकृत करने का आदेश देने की भी मांग की है. वहीं, उच्च न्यायालय ने उस याचिका पर भी केंद्र व दिल्ली सरकार से जवाब मांगा था जिसमें एक समलैंगिक पुरुष जोड़े ने शादी की पंजीकरण करने का आदेश देने की मांग की है. दोनों ने अमेरिका में विवाह किया था लेकिन समलैंगिक होने के कारण भारतीय वाणिज्य दूतावास ने विदेशी विवाह अधिनियम, 1969 के तहत उनकी शादी का पंजीकरण नहीं किया.