नई दिल्ली, 26 मार्च . भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मुस्लिम, सिख और ईसाई समुदायों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए एक बड़े जनसंपर्क अभियान की शुरुआत की है. इस पहल के तहत, गरीब और जरूरतमंद लोगों को ईद, बैसाखी और ईस्टर के अवसर पर एक विशेष त्योहार किट प्रदान की जाएगी, जिसे ‘सौगात-ए-मोदी’ नाम दिया गया है.
इस किट में सूखे मेवे, बेसन, सूजी, सेवईं, चीनी और महिलाओं के लिए सलवार-कुर्ता सेट शामिल होगा. सरकार और भाजपा इस पहल के माध्यम से 32 लाख जरूरतमंदों तक पहुंचने का लक्ष्य रख रही है.
एक तरफ जहां विपक्ष ने इस ईद किट योजना की आलोचना करते हुए इसे भाजपा की वोट बैंक राजनीति करार दिया है, वहीं मुस्लिम राष्ट्रीय मंच (एमआरएम) ने इस पहल का समर्थन किया है और इसे मोदी सरकार की गरीबों के प्रति संवेदनशीलता का प्रतीक बताया है.
एमआरएम के राष्ट्रीय प्रवक्ता शाहिद सईद ने कहा कि पिछले 11 वर्षों में मोदी सरकार ने मुसलमानों, सिखों और ईसाइयों के लिए आजादी के बाद किसी भी अन्य सरकार से अधिक ऐतिहासिक फैसले लिए हैं. यह पहल भी उसी दृष्टि का हिस्सा है और इसे संकीर्ण राजनीतिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए. यह पहल किसी एक त्योहार तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रधानमंत्री मोदी के ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने की एक और महत्वपूर्ण कड़ी है.
पीएम मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने न केवल मुस्लिम समुदाय बल्कि सिखों और ईसाइयों के लिए भी ऐतिहासिक सुधार लागू किए हैं. मुस्लिम समुदाय के लिए सरकार ने तीन तलाक पर प्रतिबंध लगाकर मुस्लिम महिलाओं को न्याय दिलाया, आर्टिकल 370 और 35ए को समाप्त कर जम्मू-कश्मीर को मुख्यधारा में लाया, वक्फ बोर्ड मामलों में पारदर्शिता बढ़ाई और प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 54 लाख मुस्लिम परिवारों को घर उपलब्ध कराए. इसके अलावा, जनधन योजना के तहत 4.5 करोड़ मुस्लिम बक खाते खोले गए, मुद्रा योजना के तहत 3.2 करोड़ मुस्लिम उद्यमियों को बिना गारंटी के ऋण दिए गए और 2 करोड़ मुस्लिम छात्रों को छात्रवृत्ति प्रदान की गई.
सिख समुदाय के लिए मोदी सरकार ने 1984 के सिख विरोधी दंगों के दोषियों को न्याय के कटघरे में खड़ा किया, गुरुद्वारों से जुड़े विवादों को हल किया और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की. करतारपुर कॉरिडोर खोलकर दशकों पुरानी मांग पूरी की गई, जिससे सिख समुदाय की धार्मिक भावनाओं का सम्मान हुआ. अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश से सताए गए सिखों को भारतीय नागरिकता देकर उन्हें सम्मान और अधिकार प्रदान किए गए. इसके साथ ही, सरकार ने खालिस्तानी आतंकवाद के खिलाफ सख्त नीति अपनाकर सिख समुदाय को आतंकवाद के साए से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
ईसाई समुदाय के लिए भी मोदी सरकार ने कई ऐतिहासिक फैसले लिए हैं. पूर्वोत्तर भारत के ईसाई बहुल क्षेत्रों में सड़क, बिजली, पानी और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार किया गया, जिससे हजारों लोगों को लाभ हुआ. ईसाई मिशनरी स्कूलों को वित्तीय सहायता प्रदान कर गरीब ईसाई छात्रों को बेहतर शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराए गए. प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना और गरीब कल्याण योजना के तहत लाखों ईसाई परिवारों को आवास और कल्याण लाभ दिए गए.
इसके अलावा, अल्पसंख्यक आयोग में ईसाइयों का प्रतिनिधित्व बढ़ाया गया और चर्चों तथा ईसाई संस्थानों पर हमलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई, जिससे उनके धार्मिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित हुई.
भाजपा के इस त्योहार उपहार अभियान की आलोचना को लेकर शाहिद सईद ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अगर गरीबों की मदद करना तुष्टिकरण कहलाता है, तो हर सरकार को ऐसा करना चाहिए. उन्होंने कहा कि यह किट किसी विशेष धर्म के लिए नहीं, बल्कि जरूरतमंदों के लिए है.
शाहिद सईद ने तथाकथित धर्मनिरपेक्ष दलों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि आजादी के बाद से भारत में लगभग 34,000 सांप्रदायिक दंगे हुए हैं, जिनमें से 99.99 प्रतिशत तथाकथित धर्मनिरपेक्ष सरकारों के कार्यकाल में हुए. उन्होंने 2006 की सच्चर कमेटी रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि कांग्रेस के शासन में मुसलमानों की स्थिति दलितों से भी बदतर थी, लेकिन कांग्रेस ने इस रिपोर्ट का उपयोग केवल राजनीति के लिए किया और किसी ठोस सुधार को लागू नहीं किया.
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एसके/एबीएम