संदेशखाली की पीड़ितों ने मीडिया को सुनाई आपबीती, राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की माँग

नई दिल्ली, 15 मार्च . पश्चिम बंगाल के संदेशखाली में कई महिलाओं के साथ कथित दुर्व्यवहार और अपमान के आरोपों के कुछ दिन बाद, क्षेत्र की पीड़ित महिलाओं के एक समूह ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की और मामले में उनसे हस्तक्षेप की माँग की.

उन्होंने संदेशखाली में “बेहद चिंताजनक” स्थिति के संबंध में राष्ट्रपति के हस्तक्षेप की माँग करते हुए एक ज्ञापन भी सौंपा.

बाद में, पीड़ित महिलाओं ने मीडिया के समक्ष अवनी दर्दनाक आपबीती सुनाई और बताया कि कैसे तृणमूल कांग्रेस नेता शेख शाहजहाँ और उनके सहयोगियों ने अपनी “खुशी” के लिए उन्हें अपमानित और प्रताड़ित किया.

उनकी ओर से बोलते हुए, सेंटर फॉर एससी/एसटी सपोर्ट एंड रिसर्च के निदेशक पार्थ बिस्वास ने बताया कि कैसे संदेशखाली की महिलाओं को ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार के ‘मौन’ संरक्षण प्राप्त स्थानीय तृणमूल ‘गुंडों’ द्वारा दैनिक दुर्व्यवहार और शोषण का शिकार होना पड़ता था.

अब निलंबित तृणमूल नेता शाहजहाँ (40), जिसे उनके समर्थक ‘भाई’ कहते थे, तब राष्ट्रीय सुर्खियों में आ गया जब संदेशखाली की महिलाओं ने अपनी चुप्पी तोड़ी और उसके तथा उसके सहयोगियों द्वारा उनके साथ किए गए अत्याचार पर बात की. बड़े पैमाने पर गुस्से और आक्रोश के बाद ममता प्रशासन बैकफुट पर आ गई और पिछले सप्ताह उसे गिरफ्तार कर लिया गया.

संदेशखाली की पीड़ितों ने अपने दुःखद और दर्दनाक अनुभव को याद करते हुए कहा कि इस क्षेत्र में महिलाओं का यौन उत्पीड़न और शोषण कोई नई बात नहीं है, यह कई वर्षों से होता आ रहा है.

बिस्वास ने कहा, “संदेशखाली में ब्लॉक-2 की निवासियों को नियमित रूप से शोषण और छेड़छाड़ का सामना करना पड़ा. शाहजहाँ और उसके सहयोगियों ने वहाँ आतंक का माहौल बना दिया. न केवल महिलाओं का यौन शोषण किया गया, बल्कि उनकी संपत्ति भी तृणमूल के गुंडों ने हड़प ली.”

जब पीड़ित लोग मदद के लिए सरकारी अधिकारियों के पास जाते थे, तो उनकी शिकायतों को अनसुना कर दिया जाता था और इसकी बजाय उन्हें उत्पीड़ण करने वालों के साथ शांति बनाने के लिए कहा जाता था.

संदेशखाली में काले प्रकरण का पर्दाफाश तब हुआ जब शाहजहाँ और उसके गुंडों ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में छापेमारी करने के लिए गाँव पहुँची ईडी और सीएपीएफ टीमों पर हमला कर दिया.

संदेशखाली के पीड़ितों ने भविष्य में किसी परेशानी से बचने के लिए अपना चेहरा छुपाए हुए मीडिया को बताया कि उन्हें शाहजहाँ जैसे गुंडों की इच्छाओं को पूरा करने के लिए रात में उठाया गया था और अगले दिन उनके घरों पर छोड़ दिया गया था.

एक अन्य पीड़ित ने कहा कि उन्होंने मीडिया से जानबूझकर दूरी बनाए रखी क्योंकि उन्हें स्थानीय माफियाओं से धमकियाँ और चेतावनियाँ मिल रही थीं.

उन्होंने मांग की, “हालाँकि शाहजहाँ अब सलाखों के पीछे है, फिर भी हमें अपनी जान का डर है. उसके भाई और साथी अभी भी खुलेआम घूम रहे हैं. उन्हें गिरफ्तार किया जाना चाहिए और राज्य सरकार को सभी अपराधियों की पहचान करनी चाहिए और उन्हें दंडित करना चाहिए.”

एकेजे/