लोकसभा में पेश की गई रिपोर्ट में खुलासा

जबलपुर, 23 मार्च . स्वास्थ्य सूचना प्रणाली की रिपोर्ट के अनुसार विगत 3 वर्षों में मातृ मृत्यु मामलों में जहां राष्ट्रीय स्तर पर कमी दर्ज की गई वहीं मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) राजय में मातृ मृत्यु के मामलें बढ़ गए हैं. उक्ताश्य की जानकारी देते हुये नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के सदस्यों ने स्वास्थ्य मंत्री मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) तथा प्रमुख सचिव स्वास्थ्य विभाग मंत्रालय, संचालक संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) को पत्र लिखकर मातृ मृत्यु मामलों में कमी लाने हेतु वेंâद्र सरकार के दिशा निर्देशों का पालन सुनिश्चित कराने की मांग की है.

भारत के महा पंजीयक द्वारा नमूना पंजीकरण प्रणाली ‘‘भारत में मातृ मृत्यु प्रवृत्तियां कारण और जोखिम कारक’’ नामक एक अध्ययन किया जा रहा है, जिसमें मातृ मृत्यु के लिए उत्तरदायी मुख्य कारकों हीमोंरेज, सैस्पिस, उच्च रक्तचाप विकार, प्रतिबंधित प्रसव, गर्भपात तथा अन्य परिस्थितियों से संबंधित है.

उत्तरप्रदेश (Uttar Pradesh) के बाद मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) का नंबर………..

प्रांतीय संयोजक मनीष शर्मा ने बताया कि स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री द्वारा लोकसभा (Lok Sabha) में प्रस्तुत की गई, रिपोर्ट से यह खुलासा हुआ है कि मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) मातृ मृत्यु के मामलें में विगत 3 वर्षों 2017-18, 2018-19, 2019-20 में उत्तरप्रदेश (Uttar Pradesh) के बाद दूसरे स्थान पर है.

रिपोर्ट के अनुसार मातृ मृत्यु के सर्वाधिक मामलें उत्तरप्रदेश (Uttar Pradesh) में 2017-18 से 2019-20 कुल 13 हजार 953 मामलें, मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) में 5 हजार 993, महाराष्ट्र (Maharashtra) में 3 हजार 851, राजस्थान (Rajasthan)में 3 हजार 885, बिहार (Bihar) में 3 हजार 576 वहीं राष्ट्रीय स्तर पर कुल 70 हजार 890 मामलें दर्ज किये गये है.

गौरतलब है कि जहां राष्ट्रीय स्तर पर मातृ मृत्यु के मामलों में उपरोक्त वर्षों में क्रमश: कमी दर्ज की गई वहीं मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) राजय में वृद्धि दर्ज की गई, वर्ष 2017-18 में 1886, वर्ष 2018-19 में 2003 में, 2014 में मामलें दर्ज किये गये.

कार्यबल गठित हो………….

उपभोक्ता मंच के डॉ.राकेश चक्रवर्ती, शिवशंकर शर्मा, प्रपुâल्ल सक्सेना, विनोद पांडे, धनंजय मजूमदार, अर्शिता पाठक, पवन कौरव, आदि सदस्यों ने पत्र के माध्यम से यह मांग की है कि प्रदेश में बढ़ती मातृ मृत्युदर पर नियंत्रण स्थापित करने हेतु वेंâद्र सरकार द्वारा जारी किये दिशा निर्देशों के पालनार्थ एवं निगरानी हेतु कार्यबल का गठन किया जाना अति आवश्यक है.

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