रिजर्व बैंक ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं मिल सकती है महंगाई से राहत – Daily Kiran
Thursday , 9 December 2021

रिजर्व बैंक ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं मिल सकती है महंगाई से राहत

नई दिल्ली (New Delhi) . रिजर्व बैंक (Bank) गवर्नर शक्तिकांत दास की अगुवाई में मौद्रिक नीति समति (एमपीसी) ने नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं किया है. लगातार आठवीं बार ब्याज दरों में कोई कमी नहीं की गई है. रेपो रेट 4% और रिवर्स रेपो रेट 3.35% पर स्थिर है. इस फैसले से अभी और सस्ते होम लोन की उम्मीदें टूट गई हैं. गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि खाद्यान्नों के रिकॉर्ड उत्पादन के कारण आने वाले महीने में खाद्य मुद्रास्फीति कम बने रहने की उम्मीद है. संक्रमण की दर में कमी और टीकाकरण से निजी उपभोग को प्रोत्साहन मिल रहा है, जबकि मुख्य मुद्रास्फीति अब भी जटिल बनी हुई है. गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक (Bank) वृद्धि के टिकाऊ आधार पर पुनरुद्धार के लिए अभी अपने नरम रुख को जारी रखेगा. उन्होंने बताया कि कोविड-19 (Covid-19) की शुरुआत के बाद से केंद्रीय बैंक (Bank) से 100 से अधिक उपाय किए हैं. मुद्रास्फीति का रुख उम्मीद से अधिक अनुकूल है और आर्थिक गतिविधियां धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ रही हैं.

दास ने आगे कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक (Bank) ने 2021-22 के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर के अनुमान को 9.5 फीसद पर कायम रखा. बता दें रिजर्व बैंक (Bank) महंगाई बढ़ने के डर से ब्याज दरों में कटौती से पहले भी इनकार कर चुका है. साथ ही महंगाई पर अंकुश के लिए वह चौतरफा कोशिश करने का सुझाव दे चुका है. रिजर्व बैंक (Bank) को महंगाई दर को चार फीसद पर दो फीसद घट-बढ़ के साथ दायरे में रखने का लक्ष्य दिया गया है, जबकि खुदरा महंगाई कई माह से पांच फीसद से ऊपर है. विशेषज्ञों का कहना है कि जिस तरह से ईंधन की कीमतें बढ़ रही हैं उसमें रिजर्व बैंक (Bank) के लिए महंगाई पर अंकुश रखना आसान नहीं होगा. कोरोना संकट में लोगों की आय घटी है. इसके बावजूद वह कर्ज लेने की बजाय बैंकों में जमा करना ज्यादा पसंद कर रहे हैं. रिजर्व बैंक (Bank) के आंकड़े इसकी गवाही दे रे हैं. रिजर्व बैंक (Bank) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक बैंकों का ऋण 24 सितंबर को समाप्त पखवाड़े में 6.67 फीसद बढ़कर 109.57 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया. इस दौरान बैंकों की जमा 9.34 फीसद की बढ़ोतरी के साथ 155.95 लाख करोड़ रुपये रही. यानी जमा की रफ्तार कर्ज से डेढ़ गुना (guna) अधिक है. एक साल पहले 25 सितंबर, 2020 को समाप्त पखवाड़े में बैंकों का ऋण 102.72 लाख करोड़ रुपये और जमा 142.62 लाख करोड़ रुपये थी. इससे पिछले 10 सितंबर, 2021 को समाप्त पखवाड़े में बैंकों का ऋण 6.7 फीसद और जमा 9.32 फीसद बढ़ी थी. वित्त वर्ष 2020-21 में बैंकों का ऋण 5.56 फीसद और जमा 11.4 फीसद बढ़ी थी.

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