आरबीआई को केंद्रीय बैंक की डिजिटल करेंसी लाने की प्रक्रिया तेज करना चाहिए – Daily Kiran
Thursday , 9 December 2021

आरबीआई को केंद्रीय बैंक की डिजिटल करेंसी लाने की प्रक्रिया तेज करना चाहिए

नई दिल्ली (New Delhi) . पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग की राय है कि भारतीय रिजर्व बैंक (Bank) (आरबीआई (Reserve Bank of India) ) को केंद्रीय बैंक (Bank) की डिजिटल करेंसी (सीबीडीसी) लाने की प्रक्रिया तेज करें या फिर उस अन्य देशों के साथ मिलकर अंतरराष्ट्रीय डिजिटल करेंसी लाने का प्रयास करना चाहिए. गर्ग मानते हैं कि डिजिटल डॉलर (Dollar) को दुनिया की प्रभावी डिजिटल मुद्रा नहीं बनने देना चाहिए. गर्ग ने कहा कि क्या क्रिप्टोकरेंसी को स्वीकार करने का वक्त आ चुका है? उन्होंने माना कि भविष्य डिजिटल मुद्रा का है और वे तकनीकी रूप से मजबूत हैं लेकिन उन्होंने निजी क्रिप्टोकरेंसी के भविष्य में प्रासांगिक रहने पर आशंका भी जाहिर की. उन्होंने कहा, आज नहीं तो कल सरकारें भी डिजिटल मुद्रा शुरू करेंगी. एक बार आधिकारिक डिजिटल मुद्रा शुरू होने के बाद स्टेबल कॉइंस सहित अधिकांश निजी करेंसी नदारद होगी. स्टेबल कॉइंस ऐसी क्रिप्टोकरेंसी है जिसकी कीमत डॉलर (Dollar) जैसी वास्तविक मुद्रा से संबद्ध रहती है.इसके बाद बिटकॉइन के उलट उनमें अटकलबाजी की गुंजाइश कम रहती है लेकिन वे निजी मुद्रा हैं जो व्यवस्थागत चुनौती प्रस्तुत करती है.

भारत सहित कई देश अपनी सीबीडीसी विकसित करने का प्रयास कर रहे हैं और गर्ग के मुताबिक इसे मौजूदा मॉडल के अलावा अलग तरह से भी तैयार किया जा सकता है. गर्ग ने कहा, हमें सीबीडीसी, थोक, खुदरा आदि के साथ प्रयोग करने के बजाय बहुत आसान एवं सीधी डिजाइन बनानी चाहिए. इसके दो बड़े विकल्प उपलब्ध हैं- आप वहीं चीज इस्तेमाल कर सकते हैं, जो आपने अब तक की है. अपनी मुद्रा या नकदी को डीमटीरियलाइज करें. इससे रुपया डीमटीरियलाइज हो जाएगा और डिजिटल रूप में सभी लेनदेन की मंजूरी दी जाए.’ उन्होंने कहा कि थोक के लिए सरकार और आरबीआई (Reserve Bank of India) अन्य क्रिप्टोकरेंसी चाह सकते हैं, लेकिन दो मुद्राएं रखना शायद अच्छा विचार साबित नहीं हो. पूर्व वित्त सचिव ने कहा कि भौतिक मुद्रा या नोट बने रहने वाले हैं, क्योंकि भारत जैसे देश में एक साथ बदलावों को लागू करना मुश्किल है. गर्ग ने कहा कि क्रिप्टो प्लेटफॉर्म असल में भविष्य हैं. गर्ग ने एक बार क्रिप्टोकरेंसी पर अंतर-मंत्रालय समिति की अगुआई की थी. उन्होंने कहा, ‘यह तकनीक सबसे ज्यादा बहु-उद्देश्यीय है.

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