Thursday , 29 July 2021

बारिश ने बढ़ा दिया किसानों का काम

भोपाल (Bhopal) . दो बार ओलावृष्टि और बारिश की मार सह चुके किसानों को अब बादलों की लुकाछिपी से भी डर लगता है. वैसे ही दो बार की बारिश ने किसानों का काम दो गुना (guna) कर दिया है.

दरअसल, खेतों में काटकर रखी गई और एकत्रित की गई दोनों ही तरह की फसलों को अब सूखाने के लिए फैलाना पड़ रहा है. जिससे किसानों को दोबारा मेहनत करना पड़ रही है. खेतों में कटी पड़ी गेहूं की उपज और मसूर, चना इत्यादि के लिए यह क्रम जारी है. वहीं, थोड़े से पानी के कारण ही खराब हो जाने वाली धनिए की उपज की भी क्वालिटी बूंदाबांदी और हल्की बारिश से खराब हुई है. हालांकि मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार आगामी दिनों में कोई स्थिति बारिश की नहीं है लेकिन फिर भी एहतियात के तौर पर किसान तैयार हैं, अपने स्तर पर सावधानी बरत रहे हैं. अभी तक किसान दो से तीन बार उपज को किसान समेट चुके हैं और फिर से सूखा रहे हैं ताकि समय से उसे निकाला जा सके.

गेहूं की पैदावार अधिक, अन्य उपज से लगभग निपटे

ब्यावरा क्षेत्र के किसान लक्ष्मीनारायण, रामलाल, रामसिंह, नारायणसिंह सहित अन्य ने बताया कि लंबे समय से किसान फसल समेटने में लगे थे लेकिन बेमौसम की बारिश ने उन्हें परेशान किया. हालांकि अब अधिकतर फसल समेट ली गई है, महज ज्यादा मात्रा में गेहूं की ही उपज शेष है. रकबा बढऩे के साथ ही पैदावार भी इस बार गेहूं की ही ज्यादा हुई है. इससे अंदेशा लगाया जा रहा है कि सरकारी खरीदी केंद्रों पर इस बार भी बड़ी तादाद में किसान गेहूं लेकर पहुंचने वाले हैं.

धनिए का भाव जोरों पर लेकिन क्वालिटी बिगड़ी

इस बार रबी की प्रमुख फसल कही जाने वाली धनिए की उपज के भाव आसमान छू रहे हैं. छह से 12 हजार रुपए क्विंटल तक बेहतर क्वालिटी का धनिया बिक रहा है, लेकिन इस बेमौसम की बारिश ने उसकी भी क्वालिटी खराब कर दी है. जिन किसानों ने बाद में रंगदार धनिए के हिसाब से इसकी बोवनी की थी उसकी क्वालिटी भी खराब हो गई है. जो 12 हजार से अधिक के भाव में जाना था वह सामान्य क्वालिटी का बनकर रह गया है. ऐसे में किसानों को इस बार भी मौसम ने जीतने नहीं दिया. प्राकृतिक आपदा का सामना करते हुए उन्हें नुकसान उठाना ही पड़ा.

झेलना पड़ रही प्राकृतिक मार

इस बार किसान दोहरी प्राकृतिक मार झेल रहे हैं. शासन सर्वे इत्यादि करवा रहा है लेकिन पहले की बीमा, मुआवजा राशि और भावांतर अटकी हुई है. जिस पर भी ध्यान देना चाहिए. किसानों की स्थिति यह है कि प्राकृतिक आपदाओं के कारण उनका लागत मूल्य तक नहीं निकलता.

गेहूं का रकबा सबसे ज्यादा

इस बार भी गेहूं का रकबा सबसे ज्यादा ही है. पानी भरपूर होने और इसमें ज्यादा झंझट नहीं होने के कारण सर्वाधिक बोवनी की गई थी. लेकिन असमय बारिश होने के कारण गेहूं हल्का होने का डर है.

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