जमशेदपुर, 3 अप्रैल . झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने वक्फ संशोधन विधेयक का विरोध करने वाले कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के सांसदों को आदिवासी विरोधी करार दिया है. उन्होंने कहा कि इस बिल में आदिवासियों की संपत्ति और उनके संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं, लेकिन इसका विरोध करने से झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस का आदिवासी विरोधी चेहरा उजागर हो गया है.
गुरुवार को मीडिया से बात करते हुए रघुवर दास ने झारखंड के आदिवासियों से अपील की है कि वे इन दोनों पार्टियों के सांसदों का सामाजिक बहिष्कार करें. इन सांसदों ने आदिवासियों के अधिकारों के पक्ष में खड़े होने के बजाय मुसलमानों का समर्थन किया है.
रघुवर दास ने कहा कि इस विधेयक में यह प्रावधान किया गया है कि अनुसूची 5 और 6 के तहत संरक्षित आदिवासी समाज की संपत्ति को वक्फ की संपत्ति नहीं घोषित किया जा सकता. यह आदिवासियों की संपत्ति, संस्कृति और उनके संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है.
उन्होंने कहा कि वह कांग्रेस को सबसे बड़ी सांप्रदायिक और तुष्टिकरण करने वाली पार्टी मानते हैं, इसलिए उसके सांसदों से इस विधेयक के समर्थन की उम्मीद भी नहीं थी. लेकिन, खुद को तथाकथित रूप से आदिवासियों का हितैषी बताने वाला झारखंड मुक्ति मोर्चा भी कांग्रेस के संपर्क में आकर तुष्टिकरण की राजनीति के जाल में फंस गया है.
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र की एनडीए सरकार ने वक्फ संशोधन विधेयक में आदिवासियों के हितों और जमीन की रक्षा के लिए प्रावधान किया है, लेकिन इसके बावजूद झारखंड मुक्ति मोर्चा के लोकसभा सांसदों ने इस बिल के खिलाफ वोट किया है. मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए आदिवासी हितों के खिलाफ जाने के झामुमो के इस कदम को झारखंड के आदिवासी समाज को देखना और समझना चाहिए.
रघुवर दास ने कहा कि झारखंड मुक्ति मोर्चा और हेमंत सोरेन को राज्य के आदिवासियों को इस बात का जवाब देना चाहिए कि क्या वो चाहते हैं कि आदिवासी क्षेत्र की जमीन को वक्फ की संपत्ति घोषित कर दिया जाए? संविधान की 5वीं अनुसूची राष्ट्रपति द्वारा पोषित है, जिसके अंतर्गत आदिवासी समाज की मूल संस्कृति और संवैधानिक अधिकारों को संरक्षित किया गया है.
दास ने रांची के पिठौरिया थाना क्षेत्र में सरहुल की शोभायात्रा के दौरान हमले की घटना को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के मुस्लिम तुष्टिकरण की कोशिशों का परिणाम बताया है. उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज जागे, हकीकत पहचाने, नहीं तो झामुमो मुस्लिम समुदाय को खुश करने और तुष्टिकरण के लिए आदिवासियों की पहचान, विरासत और संस्कृति को खत्म कर देगा.
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एसएनसी/एबीएम