
इस्लामाबाद, 8 मार्च . हाल ही में ब्रिटेन ने कानूनी रास्तों से आने वाले लोगों द्वारा बढ़ती शरण मांगों के बाद चार देशों के नागरिकों के वीजा पर “इमरजेंसी ब्रेक” लगाने का फैसला किया है. इस बीच Pakistan से कम संख्या में डिपोर्टेशन (वापसी) होने को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है.
Pakistan के प्रमुख अखबार ‘डॉन’ की रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिटेन का गृह मंत्रालय अफगानिस्तान, कैमरून, म्यांमार और सूडान के लोगों के लिए स्पॉन्सर्ड स्टडी वीजा खत्म करेगा, जबकि अफगानों के लिए स्किल्ड वर्कर वीजा भी बंद किया जाएगा.
जब ब्रिटेन की गृह मंत्री शबाना महमूद से पूछा गया कि प्रस्तावित वीजा प्रतिबंधों में Pakistan को क्यों शामिल नहीं किया गया, जबकि कानूनी वीजा पर ब्रिटेन पहुंचकर बाद में शरण मांगने वालों में Pakistanियों की संख्या सबसे ज्यादा है तो उन्होंने कहा कि यह हमारी कार्रवाई का अंत नहीं है.
हालांकि उन्होंने यह बताने से इनकार कर दिया कि क्या अन्य देशों के साथ संभावित वीजा प्रतिबंधों को लेकर बातचीत चल रही है.
Pakistan और ब्रिटेन Government के सूत्रों ने बताया कि इस्लामाबाद ब्रिटिश अधिकारियों के साथ असफल शरण आवेदकों की वापसी में सहयोग कर रहा है, लेकिन छात्र वीजा पर ब्रिटेन जाने वाले कई Pakistanी बाद में शरण के लिए आवेदन कर देते हैं.
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, ब्रिटेन में शरण मांगने वालों में Pakistanी नागरिक सबसे बड़ा समूह हैं और कुल आवेदनों में लगभग हर दस में से एक आवेदन Pakistanियों का होता है. वर्ष 2024 में 10,638 Pakistanियों ने शरण के लिए आवेदन किया, जो 2023 के मुकाबले लगभग दोगुना है और एरिट्रिया, ईरान तथा अफगानिस्तान से आए आवेदकों से भी अधिक है.
शुरुआत में कई लोग छात्र, काम या विजिटर वीजा जैसे कानूनी रास्तों से ब्रिटेन पहुंचते हैं, लेकिन बाद में शरण का दावा कर देते हैं.
Governmentी आंकड़ों के मुताबिक, Pakistanियों के 70 प्रतिशत से अधिक शरण आवेदन खारिज कर दिए जाते हैं. हालांकि अस्वीकृति दर इतनी अधिक होने के बावजूद बहुत कम लोगों को वापस Pakistan भेजा जाता है.
ब्रिटेन के गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में 10,853 Pakistanी शरण आवेदनों को खारिज किया गया, लेकिन उसी अवधि में केवल 445 लोगों को ही Pakistan वापस भेजा गया, जो कि खारिज आवेदनों का लगभग 4.1 प्रतिशत है.
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एवाई/वीसी