बंधकों की आजादी के लिए दिवंगत पोप फ्रांसिस की प्रार्थना होगी पूरी : इजरायली राष्ट्रपति

तेल अवीव, 2 मई . राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग ने पोप फ्रांसिस के निधन पर शोक पुस्तिका पर हस्ताक्षर करने के लिए जाफा में वेटिकन दूतावास का दौरा किया. उनके कार्यालय की ओर से एक्स पर यह जानकारी दी गई.

‘द टाइम्स ऑफ इजरायल’ के मुताबिक राष्ट्रपति कार्यालय ने पोस्ट किया, “राष्ट्रपति ने पवित्र भूमि और दुनिया भर में कैथोलिक समुदायों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की, उन्होंने आशा जताई कि बंधकों की रिहाई के लिए दिवंगत पोप की प्रार्थना जल्द ही पूरी होगी.”

राष्ट्रपति हर्जोग अपनी शोक पुस्तिका में लिखा है, “न्याय और शांति के लिए उनकी प्रार्थना इजरायली बंधकों की तत्काल रिहाई के माध्यम से पूरी हो, जिन्हें मानवता, नैतिकता और स्वयं ईश्वर के खिलाफ एक जघन्य अपराध में क्रूरतापूर्वक बंधक बनाया गया, घृणा और उग्रवाद का उन्मूलन हो; इजरायल के पैगम्बरों की भावना और मानवता की साझा आध्यात्मिक विरासत के अनुरूप दुनिया बढ़ती करुणा हो.”

पोप फ्रांसिस ने मृत्यु से एक दिन पहले सेंट पीटर्स स्क्वायर में हजारों श्रद्धालुओं को ‘हैप्पी ईस्टर’ की शुभकामनाएं दी थीं. बेसिलिका की बालकनी से 35,000 से अधिक लोगों की भीड़ को ईस्टर की शुभकामनाएं देने के बाद, फ्रांसिस ने अपने पारंपरिक ‘उर्बी एट ओर्बी’ (‘शहर और दुनिया के लिए’) आशीर्वाद को पढ़ने का काम एक सहयोगी को सौंप दिया.

उन्होंने भाषण में कहा , “धर्म की स्वतंत्रता, विचार की स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और दूसरों के विचारों के प्रति सम्मान के बिना शांति नहीं हो सकती है.” उन्होंने “चिंताजनक” यहूदी-विरोध और गाजा में ‘नाटकीय और निंदनीय’ स्थिति की भी निंदा की.

पोप फ्रांसिस का निधन 21 अप्रैल को हुआ. उन्होंने 88 वर्ष की उम्र में अंतिम सांस ली. पोप के पद पर उनकी नियुक्ति कई मायनों में वह एतिहासिक थी. ने कई प्रथम घटनाओं की शुरुआत की.

फ्रांसिस अमेरिका या दक्षिणी गोलार्ध से पहले पोप थे. वह पहले लैटिन अमेरिकन पोप थे. सीरिया में जन्मे ग्रेगरी तृतीय की मृत्यु 741 में हुई थी, उसके बाद से रोम में कोई गैर-यूरोपीय बिशप नहीं हुआ था. वह सेंट पीटर के सिंहासन पर चुने जाने वाले पहले जेसुइट भी थे – रोम में जेसुइट्स को ऐतिहासिक रूप से संदेह की दृष्टि से देखा जाता था.

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