Thursday , 29 July 2021

फर्जीवाड़ें के आरोपों से घिरे पॉलिटेक्निक प्राचार्य ने दी सफाई

जबलपुर, 21 मार्च . शहर में पूर्व में पदस्थ रहे कलेक्टरों के फर्जी हस्ताक्षरों के जरिए एक महिला प्रोफेसर को लगातार 10 वर्षों से प्रताड़ित कर रहे शासकीय कलानिकेतन पॉलिटेक्निक कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आर. सी. पांडे अपने ऊपर अवैध नियुक्ति सहित अन्य आरोपों से बुरी तरह घिरते जा रहे हैं. डॉ. पांडे अपने ऊपर लगे आरोपों को निराधार तो बताते हैं इस संबंध में दस्तावेज होने का दावा भी करते हैं लेकिन हैरानी की बात है कि वे कोई कागज उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैं. आलम ये है कि अपनी विवादित नियुक्ति और बीएससी और एमएससी के साथ पीएचडी को लेकर उठे विवाद पर डॉ. पांडे आरोपों को निराधार तो बताते हैं लेकिन उन्हें न तो डिग्रियों के वर्ष याद हैं न हीं उनके पास दस्तावेज उपलब्ध हैं.

पूर्व प्राचार्य के बाद महिला प्रोफेसर ने की शिकायत………….

ज्ञात हो कि डॉ. पांडे के खिलाफ कॉलेज के पूर्व प्राचार्य ने जहाँ उनकी नियुक्ति को अवैध बताते हुए शिकायत की थी वहीं वर्तमान में एक महिला प्रोफेसर द्वारा पीएचडी में इंक्रीमेंट मांगने पर कथित तौर पर प्राचार्य पांडे द्वारा लगातार विगत 10 वर्षों से प्रताड़ित किए जाने के गंभीर आरोप लगाए गए. महिला प्रोफेसर ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि डॉ. पांडे ने न सिर्फ अपने स्तर पर बल्कि कलेक्ट्रेट में पदस्थ एक कर्मचारी की मदद से पूर्व कलेक्टरों के फर्जी हस्ताक्षरों से तैयार दस्तावेजों के जरिए उन्हें प्रताड़ित किया गया. इस मामले में वर्तमान कलेक्टर (Collector) सहित अन्य अधिकारियों से आरोपी डॉ. आर. सी. पांडे के खिलाफ उच्च स्तरीय जांच कर कानूनी कार्रवाई की मांग न सिर्फ पीड़ित महिला प्रोफसर द्वारा की गई बल्कि दो पूर्व कलेक्टरों ने भी वर्तमान कलेक्टर (Collector) को इस संबंध में पत्र लिखा है. जहाँ पीड़ित प्रोफेसर ने मामले में जांच कार्रवाई के साथ स्वयं की सुरक्षा की मांग भी की है वहीं अरसे से विवादों से घिरे रहे डॉ. आर. सी. पांडे ने हाल हीं में चुप्पी तोड़ते हुए अपने ऊपर लगे आरोपों को निराधार तो बताया लेकिन अपने दावे के संबंध में एक अदद कागज भी प्रस्तुत नहीं कर पाए. वे बार-बार जल्द दस्तावेज उपलब्ध कराने आश्वस्त करते रहे.

अवैध पदोन्नति के लाभ के मामले की चल रही जांच………….

डॉ. आर. सी. पांडे के खिलाफ संजीवनी नगर गढ़ा निवासी और कलानिकेतन महाविद्यालय के पूर्व संचालक आरएन श्रीवास्तव ने अगस्त 2020 में शिकायत दी गई. शिकायत में आरोप लगाया गया कि 2003 में वीडियोग्राफर रहे आरसी पांडे, तत्कालीन प्राचार्य और अधिकारियों से मिलीभगत कर नियम विरुद्ध खुद संचालक बन गए, जबकि शासन ने 1997 में कलानिकेतन महाविद्यालय को स्वशासी घोषित कर दिया था. यहां पर कार्यरत अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए सेवा शर्तों/संविलियन संबंधी नियम शासन से अनुमोदन उपरांत 17 दिसंबर 1997 को बनाए गए थे. नियम की कंडिका 20 (2) में प्राचार्य पद को छोडक़र शेष सभी पदों में सीधी भर्ती से पद भरने का प्रावधान रखा गया है.

नियम कंडिका 21 (स) में सीधी भर्ती, पदोन्नति देने के लिए समिति बनाने के प्रावधान हैं जिसमें प्रमुख सचिव, सचिव, संचालक, प्रदेश के बाहर के दो विषय विशेषज्ञ शामिल होना था. परंतु तत्कालीन प्राचार्य द्वारा सीधे स्वशासी निकाय समिति (बीओजी) से अनुशंसा प्राप्त कर वीडियोग्राफर को पदोन्नति प्रदान कर दी. शिकायतकर्ता का आरोप है कि 14 जनवरी 2001 को बीओजी की अनुशंसा प्राप्त की गई परंतु विभाग से इसकी पुष्टि दो साल बाद कराई गई. जबकि पदोन्नति सूची एक साल तक ही मान्य होती है. शिकायतकर्ता ने बताया कि शासन द्वारा साल 2004 में नए सेवा भर्ती नियम बनाए थे जिसमें उप संचालक एलआरडीसी के पद को शासकीय संवर्ग में दिखाया गया है. तब महाविद्यालय की सोसायटी ने पदोन्नति कैसे कर दी जो जांच का विषय है. साल 2012 में तत्कालीन संचालक से मिली भगत कर वर्तमान संचालक ने तीन वेतन वृद्धियां नियम विरुद्ध तरीके से प्राप्त कर लीं.

यह है मामला…………

कालेज में 6 अप्रैल 2010 को इलेक्ट्रॉनिक्स विषय की व्याख्याता के रूप में पदस्थ प्रोफेसर राखी ठाकुर को प्राचार्य द्वारा ज्वाईनिंग के बाद से ही लगातार 10 वर्षों से कथित फर्जी हस्ताक्षरों से जारी आदेश पत्रों से प्रताड़ित किया जा रहा है. मामला महिला प्रोफेसर की जानकारी में तब आया जब उन्होंने स्वयं को मिले पत्रों के विषय में आर टी आई से पड़ताल की. वे आरटीआई से मिली उस जानकारी से अवाक रह गई जब यह ज्ञात हुआ कि ऐसा कोई पत्र कलेक्टर (Collector) कार्यालय से जारी ही नहीं हुआ. यही नहीं उन्हें पूर्व कलेक्टर (Collector) छवि भारद्वाज द्वारा हालहीं में पत्र से पता चला कि उस दस्तावेज में उन्होंने हस्ताक्षर किए ही नहीं. सूत्रों के अनुसार श्रीमति ठाकुर ने पीएचडी इंन्क्रीमेंट के लिए प्राचार्य से कोई राहत न मिलने पर कलेक्टर (Collector) जबलपुर(पदेन अध्यक्ष कालेज स्वशासी समिति) को आवेदन किया. इस कृत्य से नाराज प्राचार्य डॉ. आर. सी. पांडे ने तत्कालीन कलेक्टर (Collector) छवि भारद्वाज के कथित फर्जी हस्ताक्षर युक्त कलेक्टर (Collector) कार्यालय का पैड निर्मित किया जिसमें ये लिख दिया कि क्यों न श्रीमती ठाकुर के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की जाए. जबकि इंक्रीमेंट की मांग संबंधित दस्तावेज में इस बात का उल्लेख औचित्यहीन था.

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