नई दिल्ली, 4 अप्रैल . वक्फ संशोधन विधेयक के दोनों सदनों से पारित होने के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है. भाजपा और उसके सहयोगी दलों ने इसे गरीब मुसलमानों के हित में बताया है, जबकि विपक्षी दलों ने इसे संविधान पर हमला करार दिया है और सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही है.
मध्य प्रदेश के मंत्री विश्वास सारंग ने समाचार एजेंसी से कहा, “वक्फ बोर्ड संशोधन विधेयक अब कानून बनने वाला है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इसे लेकर जो जानकारी दी, उससे साफ है कि यह गरीब मुसलमानों के हित में है. कुछ लोग जो वक्फ की जमीनों पर अवैध कब्जा किए बैठे थे, उन्हें परेशानी हो रही है, लेकिन आम मुसलमान इस कानून का समर्थन कर रहे हैं.”
बिहार भाजपा अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने कहा, “लोकतांत्रिक तरीके से विधेयक पास हुआ. अब वक्फ की जमीन पर गरीब मुसलमानों का भी हक होगा. 2010 में लालू यादव ने संसद में कहा था कि वक्फ संपत्ति की लूट हो रही है. विपक्ष को उनका धन्यवाद देना चाहिए कि उनका सपना अब पूरा हो गया.”
जदयू के राज्यसभा सांसद संजय झा ने भी विधेयक का समर्थन करते हुए से कहा, “वक्फ बोर्ड में कुप्रबंधन था, जिसे सुधारने के लिए यह कानून लाया गया. बिहार में 73 प्रतिशत मुस्लिम पसमांदा समाज से आते हैं, इस विधेयक से उनका भला होगा.”
केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा, “जो लोग कोर्ट जाने की बात कर रहे हैं, वे जाएं. तीन तलाक, राम जन्मभूमि और अनुच्छेद 370 पर भी यही हुआ था. इस विधेयक से गरीब मुसलमानों को लाभ मिलेगा.”
राजद के राष्ट्रीय महासचिव अब्दुल बारी सिद्दीकी ने से बातचीत में कहा, “यह विधेयक अल्पसंख्यकों को संविधान में मिले अधिकारों पर हमला है. देश में आपातकाल भी लागू हुआ था, लेकिन उसे वापस लेना पड़ा था.”
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने इसे संविधान पर हमला बताते हुए कहा, “अगर इनके पास 400 सीटें होतीं, तो ये संविधान ही बदल देते. धीरे-धीरे ये संविधान को कमजोर कर रहे हैं. इस विधेयक के खिलाफ हम सुप्रीम कोर्ट जाएंगे.” शिवसेना (उद्धव गुट) ने विधेयक के खिलाफ वोट दिया, जिस पर इमरान मसूद ने कहा कि हम लंबी कानूनी लड़ाई लड़ेंगे और उम्मीद करते हैं कि उद्धव ठाकरे जैसे नेता हमारा साथ देंगे.
इस बीच, बिहार सरकार में मंत्री शीला मंडल ने वक्फ बोर्ड को लेकर सवाल उठाए. उन्होंने कहा, “वक्फ का मकसद गरीबों की मदद था, लेकिन हकीकत कुछ और है. कई मुस्लिम नेता जदयू छोड़ रहे हैं, लेकिन अगर वे दिल पर हाथ रखकर बोलें, तो मानेंगे कि नीतीश कुमार ने मुसलमानों का कितना भला किया है.”
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डीएससी/केआर