
New Delhi, 30 जून . जापान की Prime Minister साने ताकाइची तीन दिवसीय आधिकारिक दौरे पर 1 जुलाई को India पहुंचेंगी. वो 16वें भारत-जापान शिखर सम्मेलन में शामिल होंगी. यहां उनकी मुलाकात Prime Minister Narendra Modi से भी होगी. आगामी सम्मेलन पांच अहम क्षेत्रों में ठोस सहयोग पर केंद्रित रहेगा. इनमें सेमीकंडक्टर, रेयर अर्थ मिनरल्स, स्वच्छ ऊर्जा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और दूरसंचार शामिल हैं.
Prime Minister साने ताकाइची का लक्ष्य जापान की उन्नत तकनीक और निवेश क्षमता को India की विशाल विनिर्माण क्षमता और आईटी क्षेत्र की प्रतिभा से जोड़कर ऐसी औद्योगिक व्यवस्था तैयार करना है, जो विरोधी देशों पर निर्भर आपूर्ति श्रृंखलाओं से मुक्त हो.
India के लिए भी ताकाइची की आर्थिक आत्मनिर्भरता और मजबूत रक्षा व्यवस्था पर आधारित सोच काफी अहम मानी जा रही है. ऐसे समय में जब एशिया में सुरक्षा चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं, ताकाइची यह संकेत दे रही हैं कि शिंजो आबे के बाद जापान सिर्फ सतर्क कूटनीति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि India के साथ अधिक मजबूत और व्यावहारिक रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाएगा.
जापानी Prime Minister 1 से 3 जुलाई 2026 तक अपनी पहली आधिकारिक India यात्रा पर रहेंगी. दुनिया की नजर इस खास यात्रा पर है, क्योंकि ताकाइची के पूर्ववर्ती Prime Minister शिंजो आबे और Prime Minister Narendra Modi के बीच बेहद करीबी संबंध थे. दोनों नेताओं की दोस्ती तब शुरू हुई थी, जब पीएम मोदी Gujarat के Chief Minister थे और कई बार जापान का दौरा कर चुके थे.
Prime Minister बनने के बाद भी मोदी और आबे के बीच व्यक्तिगत संबंध लगातार मजबूत होते गए. 2015 में मोदी आबे को वाराणसी के घाटों पर लेकर गए थे, जहां दोनों ने अनौपचारिक अंदाज में समय बिताया. वहीं 2018 में आबे पहले ऐसे विदेशी नेता बने, जिन्हें मोदी ने जापान के यामानाशी में माउंट फूजी के पास स्थित अपने निजी अवकाश गृह में मेजबानी की थी. India के पीएम पिछले साल 15वें भारत-जापान शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए टोक्यो गए थे.
16वें शिखर सम्मेलन की बात करें तो इसका एक प्रमुख उद्देश्य ‘आर्थिक सुरक्षा सहयोग पर संयुक्त घोषणा’ को आगे बढ़ाना भी है, जिस पर पिछले साल ही हस्ताक्षर किए गए थे. विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस समझौते का मकसद दोनों देशों की रक्षा क्षमताओं और सैन्य तैयारियों को मजबूत करना है. इसके लिए दोनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल, साझा अभ्यास और सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा.
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केआर/