पीएम मोदी का जापान से नाता दशकों पुराना, मुख्यमंत्री के तौर पर 2007 में कई डील की थी सील

New Delhi, 29 अगस्त . Prime Minister Narendra Modi का वर्तमान जापान दौरा और 2007 में गुजरात के Chief Minister के रूप में उनकी जापान यात्रा दोनों ही देशों के संबंधों को मजबूत करने के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं. प्रवासी भारतीयों द्वारा उनका गर्मजोशी से स्वागत इस बात का प्रतीक है कि उनकी लोकप्रियता और प्रभाव वैश्विक स्तर पर है. 2007 के दौरे की तस्वीरें, मोदी अर्काइव ने साझा की हैं. यह तस्वीरें दर्शाती हैं कि Narendra Modi लंबे समय से जापान के साथ आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों को बढ़ावा देने के लिए प्रयासरत रहे हैं.

मोदी अर्काइव ने बताया कि Narendra Modi ने अप्रैल 2007 में गुजरात के Chief Minister के रूप में जापान की यात्रा की. जहां उन्होंने नौकरशाहों और उद्योग जगत के दिग्गजों के 40 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया. उनके मन में एक लक्ष्य था-गुजरात और उसके विस्तार में भारत को उद्योग, बुनियादी ढांचे और नवाचार के केंद्र के रूप में विश्व मानचित्र पर स्थापित करना.

टोक्यो, ओसाका, हिरोशिमा और कोबे के छह दिवसीय दौरे में उन्होंने मित्सुबिशी, मित्सुई, सुमितोमो, मारुबेनी, सुजुकी, तोशिबा, निप्पॉन स्टील, निसान स्टील, यूनिडो और त्सुनेशी शिपबिल्डिंग जैसी दिग्गज कंपनियों से संपर्क किया और जेईटीआरओ तथा गुजरात के उद्योग विभाग के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए.

जापान चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज और भारत-जापान मैत्री मंच में बंदरगाह, रसद, बुनियादी ढांचा और मानव संसाधन विकास पर चर्चा हुई, जिसमें गुजरात ने खुद को भारत की विकास गाथा में जापान के लिए स्वाभाविक प्रवेश बिंदु के रूप में प्रस्तुत किया. इस यात्रा के दौरान, Narendra Modi ने जापानी Prime Minister शिंजो आबे से भी मुलाकात की और दिल्ली-Mumbai औद्योगिक गलियारे (डीएमआईसी) पर चर्चा की.

मोदी ने आबे को गुजरात के बौद्ध धरोहर स्थलों पर एक सीडी और एक हाथ से बुनी हुई आदिवासी शॉल भेंट की, और उन्हें गुजरात आने का निमंत्रण भी दिया. बदले में, आबे ने मोदी को डीएमआईसी के गुजरात खंड के लिए जापान के पूर्ण समर्थन का आश्वासन दिया. जापानी बुलेट ट्रेन के कॉकपिट में कदम रखा. क्या हो अगर ऐसी हाई-स्पीड रेल भारतीय कनेक्टिविटी को बदल दे? 2007 में इस विचार का बीज वर्षों बाद Mumbai -Ahmedabad बुलेट ट्रेन परियोजना के रूप में फला-फूला, जो भारत-जापान सहयोग की प्रमुख परियोजना है.

Narendra Modi ने हिरोशिमा में शांति स्मारक पार्क और संग्रहालय का भ्रमण किया और इतिहास के सबक सीखने के लिए कुछ देर रुके. उन्होंने सुजुकी मीकिची साहित्यिक स्मारक और फाउंटेन की प्रार्थना में श्रद्धासुमन अर्पित किए. कोबे में, उन्होंने द इंडिया क्लब में एक सांस्कृतिक कार्यक्रम में भाग लिया, जो 1904 से प्रवासी भारतीयों के लिए एक सेतु का काम करता रहा है.

2007 की इस यात्रा ने गुजरात और जापान के बीच व्यापारिक और सांस्कृतिक संबंधों को महत्वपूर्ण रूप से विस्तारित किया. साल 2012 में Narendra Modi जापान लौटे, इस बार सिर्फ गुजरात के Chief Minister के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐसे नेता के रूप में जिनकी प्रतिष्ठा राज्य की सीमाओं से परे जाने लगी थी. 22 से 27 जुलाई तक उनकी पांच दिवसीय यात्रा जापान सरकार के औपचारिक निमंत्रण पर हुई थी.

एक दुर्लभ सम्मान, जिसके साथ कैबिनेट स्तर का स्वागत समारोह भी हुआ, जो आमतौर पर केवल शासनाध्यक्षों के लिए ही होता है. यह भारत-जापान राजनयिक संबंधों की 60वीं वर्षगांठ थी, और जापान ने इस यात्रा पर आए नेता के लिए हर संभव प्रयास किया. शीर्ष अधिकारियों और उद्योगपतियों के एक उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करते हुए, मोदी टोक्यो, हमामात्सु, नागोया, ओसाका और कोबे में 44 कार्यक्रमों में शामिल हुए – एक राष्ट्राध्यक्ष के लिए यह एक अभूतपूर्व कार्यक्रम था.

इस यात्रा के दौरान मोदी ने प्रमुख मंत्रियों-कोइचिरो गेम्बा (विदेश मामले), युकिओ एडानो (व्यापार एवं उद्योग), युचिरो हाटा (बुनियादी ढांचा एवं परिवहन), और उप-Prime Minister कत्सुया ओकाडा से मुलाकात की. उन्होंने ऐची प्रान्त के गवर्नर हिदेकी ओमुरा और ह्योगो प्रान्त के गवर्नर तोशिज़ो इदो के साथ भी विचार-विमर्श किया.

टोक्यो, हमामात्सु और नागोया में जेट्रो के निवेश सेमिनारों में उन्होंने गुजरात के ऊर्जा-अधिशेष और निवेशक-अनुकूल राज्य में परिवर्तन की बात की. उन्होंने बुनियादी ढांचे, बंदरगाहों, रसद और औद्योगिक गलियारों को भविष्य के लिए गुजरात के प्रमुख दांव के रूप में रेखांकित किया. व्यावसायिक बैठकों में सुजुकी मोटर्स के अध्यक्ष ओसामु सुजुकी के साथ एक महत्वपूर्ण सत्र शामिल था, जहां मोदी ने गुजरात को एशिया का अगला ऑटोमोटिव केंद्र बताया. बाद में उन्होंने सुजुकी के संयंत्रों का दौरा किया, जापान में कार्यरत भारतीय इंजीनियरों से बातचीत की और स्वयं सुजुकी के साथ दोपहर का भोजन किया.

ओसाका स्थित मिजुहो कॉर्पोरेट बैंक और इंपीरियल होटल में कॉर्पोरेट नेताओं के साथ गोलमेज बैठकें आयोजित की गईं, जिससे भारत-जापान कॉर्पोरेट संबंध और मजबूत हुए. 2007 की तरह, शिंकानसेन बुलेट ट्रेन सिर्फ परिवहन से कहीं बढ़कर थी. यह एक प्रेरणा थी. Narendra Modi ने टोक्यो से हमामात्सु तक हिकारी लाइन पर यात्रा की और Ahmedabad-Mumbai -पुणे हाई-स्पीड रेल और Ahmedabad-धोलेरा मेट्रो की संभावनाओं पर चर्चा की.

उनका ध्यान सिर्फ़ गति पर ही नहीं, बल्कि जापान की दक्षता और सुरक्षा के मिश्रण को दोहराने पर भी था. कोबे बंदरगाह पर, उन्होंने उन्नत समुद्री बुनियादी ढांचे की समीक्षा की और बताया कि कैसे इसकी प्रणालियां गुजरात के अपने बंदरगाह विस्तार का मार्गदर्शन कर सकती हैं. उनकी इस यात्रा ने दिल्ली-Mumbai औद्योगिक गलियारे (डीएमआईसी) में गुजरात की केंद्रीय भूमिका की पुष्टि की, जिसमें उसका विशाल भू-भाग और रणनीतिक तटरेखा शामिल है. कूटनीति के बीच, संस्कृति के लिए भी जगह थी.

मोदी ने टोक्यो में जापान के गुजरात समाज को संबोधित किया, इंडिया सेंटर फ़ाउंडेशन के सदस्यों से मुलाकात की, और एचसीसीआई के अध्यक्ष मिमुरो द्वारा आयोजित स्वागत समारोह में सम्मानित हुए. कोबे स्थित इंडिया क्लब, जो प्रवासी भारतीयों का एक ऐतिहासिक संस्थान है. उन्होंने भारतीय और गुजराती समुदाय के साथ बातचीत की और भावनात्मक बंधन को मजबूत किया.

उन्होंने कोबे बंदरगाह पर नाव की सवारी का भी आनंद लिया, जो जलमार्गों पर मित्रता का प्रतीक है. जापानी प्रतिष्ठान तो प्रभावित हुआ ही, साथ ही उसका मीडिया भी प्रभावित हुआ. देश के सबसे बड़े व्यावसायिक दैनिक, निक्केई ने 742 शब्दों का एक लेख प्रकाशित किया जिसमें मोदी को एक “व्यापार-हितैषी नेता” बताया गया और यहां तक कि उन्हें 2014 में भारत के Prime Minister पद का एक प्रबल दावेदार” भी बताया गया.

जापान के सबसे कुशल राजनयिकों में से एक, राजदूत अकिताका सैकी ने मोदी को उनके “तेज शासन” के कारण अन्य मुख्यमंत्रियों से अलग बताया. मोदी के साथ उनकी बातचीत के दौरान उन्होंने टिप्पणी की कि गुजरात मॉडल भारत के विकास का खाका बन सकता है. ऐसे समय में जब जापानी निवेशक भारत के अन्य हिस्सों में अस्थिरता को लेकर चिंतित थे, मोदी की बात—जिसमें गुजरात में शून्य बिजली कटौती, बंदरगाह-आधारित विकास और नीतिगत स्पष्टता का रिकॉर्ड शामिल था—सबसे अलग दिखी. जो मुहावरा प्रचलन में आया वह स्पष्ट था: मोदी मीन्स बिजनेस.

डीकेएम/केआर