नई दिल्ली, 2 अप्रैल . भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल के जहाजों के लिए नए डीजल इंजन विकसित किए जाएंगे. इसकी लागत करीब 270 करोड़ रुपये है. बुधवार को रक्षा मंत्रालय ने इसे मंजूरी दी. यह एक स्वदेशी परियोजना है.
अब तक ऐसे ज्यादातर इंजन विदेशों से आयात किए जा रहे हैं, यानी इस परियोजना से आत्मनिर्भर भारत की पहल को बल मिलेगा. विकसित किए गए इंजनों का उपयोग भारतीय नौसेना और भारतीय तटरक्षक बल के जहाजों पर मुख्य प्रोपल्शन तथा विद्युत उत्पादन के लिए किया जाएगा.
भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल के उपयोग हेतु 6 मेगावाट मध्यम गति के समुद्री डीजल इंजन का डिजाइन तैयार किया जाएगा और उसे विकसित किया जाएगा. इसके लिए नौसेना और किर्लोस्कर ऑयल इंजन्स लिमिटेड के बीच मेक-I श्रेणी के अंतर्गत परियोजना स्वीकृति आदेश पर हस्ताक्षर हुए हैं.
सचिव (रक्षा उत्पादन) संजीव कुमार और नौसेना उप प्रमुख वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन की उपस्थिति में नई दिल्ली स्थित साउथ ब्लॉक में इस समझौते पर हस्ताक्षर किए गए.
परियोजना के अंतर्गत इस प्रोटोटाइप डीजल इंजन का विकास 270 करोड़ रुपये की लागत से किया जाएगा. इस प्रोटोटाइप डीजल इंजन में 50 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल होगा. इसका 70 प्रतिशत वित्त पोषण भारत सरकार द्वारा किया जाएगा. इस अनुबंध में 3 से 10 मेगावाट डीजल इंजन के लिए विस्तृत डिजाइन का विकास भी शामिल है.
उच्च क्षमता वाले अधिकांश डीजल इंजन अब तक विदेशी मूल उपकरण निर्माता (ओईएम) से आयात किए जा रहे थे. यह परियोजना देश में समुद्री इंजन के विकास में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने की प्रक्रिया का शुभारंभ करेगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार द्वारा महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं.
इसमें प्रौद्योगिकियों को स्वदेशी बनाने और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने के प्रयास शामिल हैं. ऐसे विभिन्न प्रयासों की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है. इससे देश की स्वदेशी क्षमताएं और भी बेहतर होंगी.
इसके साथ ही विदेशी मुद्रा की भी बचत होगी. वहीं, स्वदेशी तकनीक और निर्माण से विदेशी मूल उपकरण निर्माताओं पर निर्भरता भी कम हो जाएगी. यह पहल देश में रक्षा औद्योगिक इकोसिस्टम के विकास के लिए उत्प्रेरक का कार्य करेगी.
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