Saturday , 19 June 2021

ब्लैक पैंथर से गुलजार हुआ पेंच टाइगर नेशनल पार्क

भोपाल (Bhopal) .सिवनी का पेंच टाइगर नेशनल रिजर्व पार्क बाघों और कॉलर वाली बाघिन को लेकर आकर्षण का केंद्र है. लेकिन इस समय यहां काला तेंदुआ ( बघीरा) सैलानियों के लिए ज्यादा आकर्षक का केंद्र बना हुआ है. पार्क में विशेष तौर पर सैलानी ब्लैक पैंथर को ही देखने के लिए पहुंच रहे हैं. यह बगीरा आसानी से भी देखा जा सकता है. नेशनल पार्क में काले रंग का तेंदुआ सामान्य तेंदुए के साथ भी आसानी से विचरण करते हुए मिल जाता है.

पार्क में कई सैलानी जंगल बुक के किरदार बघीरा को पेड़ पर भी देख अचंभित रह गए. बघीरा एक विलुप्त जानवर है जो कि पूरे भारत में अब तक कहीं नहीं देखा गया है. इसका वर्णन रुल्यर्द किपलिंग की बुक द जंगल बुक में है. बघीरा की वजह से नेशनल पार्क में सैलानियों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है. मादा तेंदुए ने तीन शावकों को जन्म दिया था, इनमें से एक काले रंग का शावक था. मई 2020 में यह नजर आया था, तब उसकी उम्र लगभग 2 महीने रही होगी.
ब्लेक पैंथर के पीछे वैज्ञानिक तथ्य

पेंच डायरेक्टर विक्रम परिहार का कहना है कि काले रंग के बघीरा को लोग भले ही दुर्लभ मान रहे हो. लेकिन तेंदुए के इस शावक में मेलानिन की मात्रा ज्यादा होने की वजह से इसका रंग काला हो गया है. इसी काले रंग की वजह से यह सैलानियों के बीच आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. विक्रम परिहार ने बताया कि पेंच नेशनल पार्क में 2020 में बाघों की संख्या बढ़कर 64 हो गई है. इसमें बाघों की संख्या 30 है और बाघिन की संख्या 34 है. वहीं शावकों की संख्या 23 है.
पेंच नेशनल पार्क में सैलानियों के लिए है यह व्यवस्था

पेंच नेशनल पार्क में कुल 7 गेट से सलानियों की एंट्री हो रही है. ब्लैक पैंथर के दीदार पार्क के बेलिया गेट के बफर जोन क्षेत्र से होते है. पार्क में प्रवेश के लिए सैलानियों के प्रवेश के लिए ऑनलाइन 1500 रुपए का टिकट बुक करना पड़ता है. जंगल सफारी के लिए सैलानियों को 2500 रुपए जिप्सी के लिए देना होता है. नेशनल पार्क में सैलानियों के लिए प्रशिक्षित गाइड भी उपलब्ध है. वहीं पेंच पार्क के लगभग सभी गेट के आसपास निजी होटल (Hotel) सहित सरकारी विश्राम गृह हैं.

 

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