Monday , 10 May 2021

पत्रकारों का धरना, जनता की सहभागिता, प्रशासन बना रहा मूकदर्शक

थांदला/झाबुआ . जिले के सब डिवीजन मुख्यालय थांदला में पत्रकारों द्वारा स्थानीय नगर परिषद में कथित रूप से व्याप्त भ्रष्टाचार, अतिक्रमण, एवं परिषद के ही जनप्रतिनिधियों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से परिषद की दुकानें नीलाम करने के विरोध में आजाद प्रतिमा के समक्ष 20दिसंबर से किया जा रहा धरना आज समाप्त कर दिया गया. इन्हीं मुद्दों को लेकर पत्रकार अगले महीने भूख हड़ताल करने की तैयारी कर रहे हैं. नगरीय पत्रकारों ने बताया कि जनहित के मुद्दों पर आमजन की स्वीकार्यता थी,उनका सहयोग भी मिला किन्तु स्थानीय प्रशासन किंकर्तव्यविमूढ़, मूकदर्शक बना रहा. उल्लेखनीय है कि नगर परिषद थांदला द्वारा राजस्व भूमि पर अतिक्रमण कर बनाई गई दुकानें नियमों की आड़ लेकर परिषद के सदस्यों के चहेतों को दी गई, और छोटे दुकानदारों के हितों पर कुठाराघात किया गया है इसी मुद्दे को लेकर तथा थांदला नगर परिषद मे कथित रूप से व्याप्त भ्रष्ट कार्य प्रणाली भाई भतीजावाद एवं निम्नस्तरीय निर्माण कार्य के खिलाफ नगर के पत्रकारों ने पहले प्रशासन को अवगत कराया था और प्रशासनिक ध्यानाकर्षण के अभाव में स्थानीय आजाद चौक पर आजाद प्रतिमा के समक्ष धरना देते हुए स्थानीय प्रशासन से कार्यवाही की अपेक्षा की थी किन्तु कोई प्रशासनिक कार्यवाही नहीं की गई.

आश्चर्य का विषय है कि एक तरफ तो तहसीलदार थांदला ने नगर परिषद द्वारा राजस्व भूमि पर अतिक्रमण कर दुकानें निर्माण किया जाना पाया और 28 अक्टूबर को आदेश पारित कर 2दिसम्बर तक राजस्व भूमि से अतिक्रमण कर किए गए निर्माण को हटाने और अतिक्रमित भूमि को पूर्व स्वरुप मे लायेजाने के निर्देश दिये थे किंतु दूसरी तरफ अब तक नगर परिषद द्वारा न तो इस आदेश का पालन ही किया गया और न ही न्यायालय तहसीलदार के आदेश की अवहेलना किए जाने पर अभी तक परिषद पर कोई भी कार्यवाही ही की गई है. यही नहीं बल्कि तहसीलदार ने अवैध रूप से निर्माण कार्य को लेकर इस हेतु परिषद पर ₹5000/जुर्माना भी लगाया किंतु आगे कोई कार्यवाहवाही नहीं की गई. जब कार्यवाही की बात आई तो प्रशासनिक अधिकारी जहां एक दूसरे पर कार्यवाही किए जाने की बात कहते रहे वहीं इस मामले में प्रेस को कुछ कहने से बचते हुए भी लगे. ‌‌‌‌‌पिछले सप्ताह मे जिला स्तरीय समीक्षा बैठक में जिला कलेक्टर (Collector) रोहितसिंंह ने जिले में अवैध कब्जा हटाए जाने की कार्यवाही की प्रगति की समीक्षा की और थांदला तहसीलदार को अतिक्रमण न हटाने पर शोकाज नोटिस जारी करने के निर्देश दिए थे. बावजूद इसके इस बाबत कोई कार्यवाही नहीं की गई और इधर परिषद अतिक्रमण के नाम पर छोटे दुकान दारों को परेशान कर रही है.

उल्लेखनीय है कि नगर परिषद की कार्यप्रणाली, आर्थिक अनियमितता एवं कथित रूप से व्याप्त भ्रष्टाचार को लेकर पिछले समय मे कई शिकायते लोकायुक्त,संभागीय नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग को की गई थी, इस पर संभागीय नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के संयुक्त संचालक अभयराजन गांवकर तथा कार्य पालनयंत्री गजानंद चौहान ने अपनी टीम के साथ नगर परिषद का निरीक्षण किया था तब भी यहाँ के जागरूक नागरिको व पत्रकारों ने नगर परिषद द्वारा कराए जा रहे निर्माण आदि कार्यो मे भ्रष्टाचार को लेकर उनका ध्यान आकर्षित कर शिकायत की थी और तब संभागीय संयुक्त संचालक ने भी नगर परिषद में वित्तीय अनियमितता का अंदेशा जताया था और परिषद की कार्य प्रणाली पर अप्रसन्नता जाहिर करते हुए शिकायत संबंधित स्टाक रजिस्टर एवं निर्माण संबंधी दस्तावेज जप्त कर लिए थे. संयुक्त संचालक ने पत्रकारों से बातचीत में भी वित्तीय अनियमितता होने का अंदेशा जताया था. उन्होंने कहा था कि प्रदेश में थांदला नगर परिषद ही एक मात्र ऐसी नगर परिषद है जिसके द्वारा मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) शासन द्वारा बनाए गये पोर्टल पर आय व्यय एवं निर्माण संंबंधी कोई जानकारी नहीं डाली गई है संभागीय संयुक्त संचालक ने परिषद द्वारा कराए जा रहे निर्माण कार्यों का भी निरीक्षण किया था और आपत्ति जताते हुए संबंधित ठेकेदार को आवश्यक निर्देश देने संंबंधी आदेश दिया था.

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