हमारा संविधान हमारी गीता है, बाइबल है, इसका सम्मान करना हम सबका कर्तव्य है: नायडु – Daily Kiran
Thursday , 9 December 2021

हमारा संविधान हमारी गीता है, बाइबल है, इसका सम्मान करना हम सबका कर्तव्य है: नायडु

नई दिल्ली (New Delhi) . उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडु ने कहा कि हमारा संविधान हमारी गीता है, बाइबल है और इसका सम्मान करना हम सबका पवित्र कर्तव्य है. संविधान और संस्कृति को परस्पर पूरक बताते हुए उन्होंने कहा कि संविधान में निहित मूल्य समाज के संस्कारों से ही बल पाते हैं. उपराष्ट्रपति आज जोधपुर (Jodhpur) में आयोजित एक अवसर पर राजस्थान (Rajasthan) के राज्यपाल कलराज मिश्र के लेखों के संकलन “संविधान, संस्कृति और राष्ट्र” का लोकार्पण कर रहे थे. इस पुस्तक में कलराज मिश्र द्वारा संविधान, संस्कृति, राष्ट्र, शिक्षा, लघु उद्यम, इनोवेशन, आत्म-निर्भर भारत तथा राजस्थान (Rajasthan) का इतिहास एवं संस्कृति जैसे समसामयिक विषयों पर, देश के विभिन्न पत्रों में लिखे गए लेखों का संकलन है. उपराष्ट्रपति ने कहा कि हमारे संविधान की उद्देशिका में न्याय, स्वतंत्रता, समता के साथ साथ राष्ट्र की एकता और अखंडता को पर विशेष बल दिया है. उन्होंने कहा कि इन महान आदर्शों को सिद्ध करने के लिए नागरिकों में सामाजिक संस्कार होना जरूरी है. उन्होंने कहा कि न्याय के लिए नागरिकों में संवेदना होना आवश्यक है और बिना अनुशासन के स्वतंत्रता अराजकता बन जायेगी. समता के लिए व्यक्ति में करुणा और सहानुभूति होना जरूरी है. साथ ही यह भी जोड़ा कि देश की एकता और अखंडता को मजबूत करने के लिए समाज में बंधुत्व और भाईचारा होना आवश्यक है. उपराष्ट्रपति ने कहा कि इन सामाजिक संस्कारों से ही संवैधानिक आदर्श सिद्ध किए जा सकते हैं और ये संस्कार परिवार में, शिक्षण संस्थाओं में, सामाजिक, राजनैतिक संगठनों में पड़ते हैं. उन्होंने कहा कि युवा ध्यान रखें कि समाज अधिकारों और कर्तव्यों में संतुलन की अपेक्षा करता है. उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी ने भी कहा था कि “कर्तव्यों के हिमालय से ही अधिकारों की गंगा निकलती है. उपराष्ट्रपति ने आशा व्यक्त की है कि नई शिक्षा नीति देश को भविष्य की संभावनाओं के लिए तैयार करेगी और हमें हमारे अतीत की गौरवपूर्ण ज्ञान और शौर्य परंपराओं से भी परिचित कराएगी. उपराष्ट्रपति भारतीय भाषाओं और उनके समृद्ध साहित्य के संरक्षण और संवर्धन के समर्थक रहे हैं. उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति हमारी भाषाओं को सम्मान देगी जो हमारी संस्कृति और ज्ञान परंपरा की धरोहर हैं. इस अवसर पर राजस्थान (Rajasthan) के राज्यपाल कलराज मिश्र, पुस्तक के प्रकाशक प्रभात प्रकाशन तथा अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे.

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