MPUAT में वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप को पुष्पाजंली का आयोजन

उदयपुर (Udaipur). महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्य़ोगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर (Udaipur)  के छात्र (student) कल्याण निदेशालय के तत्वावधान में दिनांक 13.06.2021 को वीर शिरोमणी, प्रातः स्मरणीय महाराणा प्रताप की जन्म जयन्ती  के अवसर पर, राजस्थान (Rajasthan)कृषि महाविद्यालय परिसर में स्थित अश्वारूढ महाराणा प्रताप की रणाभूषणो से सुसज्जित भव्य प्रतिमा के समक्ष पुष्पाजंली कार्यक्रम रखा गया.

राजस्थान (Rajasthan)कृषि महाविद्याालय परिसर में स्थित महाराणा प्रताप की अश्वारूढ प्रतिमा के समक्ष विश्वविद्यालय कुलपति डाॅ. नरेन्द्र सिंह राठौड, वित्तनियंत्रक, अधिष्ठाता आरसीए, अधिष्ठाता सीटीएई, अधिष्ठाता सीसीएएस, निदेशक अनुसंधान, निदेशक प्रसार शिक्षा, निदेशक आयोजना एवं परिवेक्षण, एवं वरिष्ठ अधिकारियों ने महाराणा प्रताप को पुष्पाजंली अर्पित करते हुए स्मरण किया.

छात्र (student) कल्याण निदेशालय, अधिकारी डाॅ. सुधीर जैन ने बताया कि हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी महाराणा प्रताप की जन्म जयन्ती पर पुष्पाजंली कार्यक्रम कोविड-प्रोटोकॅाल को ध्यान में रख कर किया गया. कार्यक्रम माननीय कुलपति डाॅ. नरेन्द्र सिंह राठौड की उपस्थिति में सम्पन्न किया गया. इस अवसर पर कोविड पालना के तहत विश्वविद्यालय वरिष्ठ अधिकारी परिषद के समस्त सदस्य उपस्थित रहेें.

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति डाॅ. नरेन्द्र सिंह राठौड ने प्रताप जयन्ति पर अश्वारूढ महाराणा प्रताप की प्रतिमा पर पुष्पाजंलि अर्पित की. इस अवसर पर विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारी परिषद के सदस्यों ने भी पुष्पाजंलि अर्पित की. डाॅ. राठौड ने कहा कि ‘‘महाराणा प्रताप की जयन्ति पर कोविड को ध्यान में रखते हुए उनकी छापामार युद्व प्रणाली का अनुसरण करने की आवश्यकता है. उन्होने उस प्रणाली को लाॅकडाउन और छूट की गतिविधियों को उससे जोडते हुए कहा कि हम स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए सीमित संसाधनों के साथ भी अपनी कार्य क्षमता और दक्षता बढ़ानी होगी. आपने बताया कि किस प्रकार से प्रताप ने आत्म शक्ति, आत्म बल, आत्मानुशासन, दृढ इच्छा शक्ति एवं जन सहयोग के बल पर अपने स्वाभिमान के साथ मेवाड के गौरव को सदेव ऊॅचा रखा.

इस अवसर पर छात्र (student) कल्याण अधिकारी डाॅ. सुधीर जैन ने  महाराणा प्रताप को प्रातः स्मरणीय व स्वाधीनता का रक्षक बतातें हुए कहा कि उनका जीवन संधर्ष पूर्ण रहा. उन्होने कृषि विकास के लिए भी अभूतपूर्व योगदान दिया था. महाराणा प्रताप का जन्म 9 मई, 1940 को हुआ. 1572 ई. में मेवाड रियासत के 13 वें महाराणा के रूप में राजगद्वी संभाली, महाराणा उदय सिंह, महाराणी जयवन्ता बाई के इस ज्येष्ठ पुत्र ने विश्वपटल पर मेंवाड की अपनी एक अलग लौ लगाई, जो आजतक दैदिप्यमान हैं. महाराणा प्रताप को शौर्य पराक्रम और त्याग की प्रतिमुर्ती के रूप में जाना जाता हैं.

प्रताप शोध पीठ के प्रभारी प्रो. एस.एस. सिसोदिया ने भी महाराणा प्रताप  के जीवन और इतिहास पर जानकारी देते  हुए कहा कि महाराणा प्रताप में मानवीयता कूट-कूट कर भरी थी. उन्होने सम्प्रदाय एवं ऊच नीच को खत्म किया उनकी सेना में सभी वर्ग के लोगो का समान सम्मान था. इसीलिए उन्है जननायक भी कहा जाता हैं. सिसोदिया वंश की परम्परा के वे पूर्ण निर्वाहक रहें. वही निदेशक अनुसंधान डाॅ. शान्ति कुमार शर्मा ने अपने अध्ययन काल में गुरू द्वारा महाराणा प्रताप के जीवन और मेवाड से  9 व 10 के अंको के जुडाव का महत्व बताया.

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