Saturday , 31 October 2020

252 करोड़ की लक्ष्‍मीविलास होटल 7.50 करोड़ में बेची, पूर्व केन्द्रीय मंत्री शौरी सहित पांच के खिलाफ भ्रष्टाचार का मुकदमा दर्ज करने के आदेश

जोधपुर. उदयपुर (Udaipur) की प्रसिद्ध लक्ष्मी विलास पैलेस होटल (Hotel) को वर्ष 2002 में औने-पौने दामों में बेचकर सरकार (Government) को करोड़ों रुपए का नुकसान पहुंचाने के मामले में CBIकी विशेष कोर्ट जोधपुर के जज पूरण कुमार शर्मा ने प्रसंज्ञान लेते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री अरु ण शौरी व अन्य आरोपियों के खिलाफ धोखाधडी व भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए हैं. साथ ही कोर्ट ने होटल (Hotel) को उदयपुर (Udaipur) कलेक्टर (Collector) को कुर्क करने के भी आदेश दिए हैं, यह होटल (Hotel) कोर्ट का फैसला आने तक कुर्क रहेगा.

मामले के अनुसार विनिवेशन मंत्रालय के तत्कालीन सचिव प्रदीप बेजल के लोक सेवक के रूप में कार्यरत रहते हुए अपनी पदीय स्थिति का दुरुपयोग कर लाजार्ड इंडिया प्राइवेट लिमिटेड नई दिल्ली (New Delhi) के तत्कालीन मैनेजिंग डायरेक्टर आशीष गुहा, मैसर्स कांतिलाल कर्मसे कंपनी मुंबई (Mumbai) व भारत होटल (Hotel) लिमिटेड नई दिल्ली (New Delhi) के अधिकृत प्रतिनिधि व भारत सरकार (Government) के अज्ञात अधिकारियों व निजी व्यक्तियों के साथ मिलकर मैसर्स लक्ष्मी विलास पैलेस होटल (Hotel) उदयपुर (Udaipur), जो कि आईटीडीसी नई दिल्ली (New Delhi) की ईकाई थी, के विनिवेशन के संबंध में आपराधिक षडयंत्र रचकर भारत सरकार (Government) को 143. 48 करोड रुपए की सदोष हानि पहुंचाई. CBIने इस मामले में एफआईआर (First Information Report) दर्ज की थी तथा CBIने जांच कर अंतिम रिपोर्ट पेश की.

मूल्यांकनकर्ता नियुक्त किया : प्रकरण में संपति का मूल्यांकनकर्ता नियुक्त किया गया है, वह पहले आईटीडीसी द्वारा नियुक्त करने का निर्णय किया गया था, लेकिन बाद में मूल्यांकनकर्ता की नियुक्ति का निर्णय विनिवेश मंत्रालय के अधिकारी प्रदीप बैजल व मंत्री अरुण शौरी ने अपने हाथ में ले लिया. अपनी मर्जी से ही मैसर्स कांति कर्मसे को मूल्यांकनकर्ता नियुक्त कर दिया, जो कि सरकारी मान्यता प्राप्त संपत्ति मूल्यांकनकर्ता की सूची में नहीं था. उसने संपत्ति का मूल्यांकन अपनी मर्जी से कर दिया और होटल (Hotel) की जमीन को केवल 45 रुपए वर्ग फीट का माना. आरोपियों को गिरμतारी वारंट से तलब करने के आदेश : कोर्ट ने कहा, कि CBIके अन्वेषण के दौरान 193 करोड 28 लाख रुपए तथा संपत्ति की कीमत 58 करोड आ गई थी.

इस प्रकार होटल (Hotel) की कुल कीमत 252 करोड़ रुपए थी. उसका केवल 7 करोड 52 लाख रुपए में ही बेचान कर दिया गया, जो किसी भी आधार पर युक्तियुक्त प्रतीत नहीं हो सकता है. पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी व सचिव प्रदीप बैजिल ने अपने पदों का दुरुपयोग किया है तथा केंद्र सरकार (Government) को 244 करोड रुपए का नुकसान पहुंचाया है. कोर्ट ने पूर्व मंत्री शौरी, बैजिल, आशीष गुहा, कांतिलाल कर्मसे व ज्योत्सना शूरी के विरूद्ध प्रथम दृष्टया धारा 120 बी आईपीसी की धारा 12 (1) (डी) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 का अपराध बनना पाया जाता है. कोर्ट ने इनके खिलाफ फौजदारी प्रकरण दर्ज कर सभी आरोपियों को गिरμतारी वारंट से तलब करने के आदेश दिए है. कोर्ट ने होटल (Hotel) को कुर्क कर राज्य सरकार (Government) के अधीन करने के भी आदेश दिए हैं. कुर्क संपत्ति की व्यवस्था के लिए कलेक्टर (Collector) उदयपुर (Udaipur) को रिसीवर नियुक्त किया गया.