
New Delhi, 1 अप्रैल . राज्यसभा ने Wednesday को ध्वनि मत से केंद्रीय सशस्त्र Police बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक, 2026 पारित कर दिया. इस दौरान विपक्ष ने वॉकआउट कर दिया. विपक्ष चाहता था कि विधेयक को आगे विचार-विमर्श के लिए चयन समिति को भेजा जाए. राज्यसभा से वॉकआउट करने के बाद संसद परिसर में मीडिया से बात करते हुए विपक्ष के सांसदों ने Government पर मनमानी करने का आरोप लगाया.
राज्यसभा से वॉकआउट करने के बाद संसद परिसर में से बातचीत में कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने सोच-विचारकर जो निर्णय लिया था, आज ये मोदी Government बहुमत के बल में उसे रौंद रही है.
सुरक्षा बल और जवान हमारे देश की सीमाओं की सुरक्षा करते हैं. संसद की हिफाजत करते हैं, अब उनके हक पर Government डकैती डाल रही है. दुखद बात ये है कि जब इससे जुड़ी कमिटी बनी तो सीएपीएफ के लोगों को अपनी बात रखने का मौका तक नहीं दिया गया. विरोधी दलों और हमारे सहयोगियों ने इसलिए बहिष्कार कर दिया है.
आप सांसद संजय सिंह ने कहा कि देश की 15 हजार किमी सीमा की सुरक्षा करने वाले हमारे जवानों और सीएपीएफ के अधिकारियों का हक मारने के लिए Government नया कानून लेकर आई है. Supreme Court का आदेश होने के बाद Government ये लेकर आई है. 6 समितियां समेत तमाम अधिकारियों की कमेटियों ने कहा कि सीएपीएफ के अधिकारियों को प्रमोशन मिलना चाहिए. उन्हें अधिकार मिलना चाहिए.
उन्होंने कहा कि Government ने आज काला कानून पास किया है. 11 लाख सीएपीएफ के जवान और अधिकारी इस Government की तानाशाही को देख रहे हैं. जब वक्त आएगा तो वे लोग जवाब जरूर देंगे.
वहीं राजद सांसद मनोज झा ने कहा कि पूरे विपक्ष ने कुछ सवाल उठाए थे, जो जवानों के मन में व्याप्त हताशा से जुड़े हुए थे. Government अब एक फोर्स को दूसरे फोर्स के खिलाफ खड़ा कर रही है. पहले ये समुदायों को लड़ाते थे और अब ये फोर्स को आमने-सामने खड़ा कर रहे हैं. विपक्ष की आपत्तियों का जवाब मंत्री के पास नहीं था. इसके बाद पूरे विपक्ष ने इसका बहिष्कार कर दिया. मैं जवानों से कहना चाहता हूं कि ये लड़ाई इस बिल के पास होने के बाद खत्म नहीं हो रही है.
बीजेडी सांसद सस्मित पात्रा ने कहा कि सीएपीएफ बिल के संदर्भ में हमने सदन का बहिष्कार कर दिया है. हमारे पास दो से तीन मुद्दे थे, जिन पर हम चर्चा चाहते थे. हम इसे सेलेक्ट कमिटी या स्टैंडिंग कमिटी के पास भेजना चाहते थे. विपक्ष द्वारा मुद्दे उठाए गए, लेकिन Government की तरफ से जवाब नहीं दिया गया. जवानों और सीएपीएफ के मुद्दे पर बीजू जनता दल हमेशा उनके साथ खड़ी है.
शिवसेना (यूबीटी) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि भाजपा देश में विभाजनकारी सोच लेकर आई है, उसी तरह सुरक्षा बलों में भी विभाजन करने की कोशिश की जा रही है. चर्चा के दौरान सभी का विश्वास जीतना जरूरी था, लेकिन उन्होंने आत्मविश्वास कम करने का काम किया है. जिस तरह बिल लाया गया है और Supreme Court के फैसले के बाद भी यह किया जा रहा है, तो इससे साफ है कि Government मनमानी कर रही है.
वहीं रेणुका चौधरी ने कहा कि संसद में जब हम सवाल करते हैं तो हम उम्मीद करते हैं कि हमें जवाब मिले. जवानों के साथ जो नाइंसाफी हो रही है, ये लोगों को समझ आ रही है. इसके खिलाफ हम आवाज उठाते रहेंगे. हमें जब जवाब नहीं मिला तो हमने बहिष्कार कर दिया.
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एएमटी/डीएससी