Friday , 26 February 2021

किसानों को कृषि बिल को लेकर गुमराह कर रही विपक्षी पार्टियां अपने गिरेबान में झांक कर देखें-कैलाश चौधरी


नई दिल्ली (New Delhi)( ). प्रदेश भाजपा कार्यालय में आज केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी एवं दिल्ली भाजपा अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने कृषि बिल के समर्थन में और विपक्षी पार्टियों द्वारा किए जा रहे नकारात्मक प्रचार को असफल करने के उद्देश्य से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से किसान वर्चुअल रैली को संबोधित किया. कार्यक्रम का संचालन प्रदेश उपाध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने किया. इस अवसर पर प्रदेश महामंत्री दिनेश प्रताप सिंह, मीडिया (Media) प्रमुख नवीन कुमार, प्रदेश मंत्री श्रीमती संतोष गोयल, सरदार इम्प्रीत सिंह बक्शी, दिल्ली भाजपा महिला मोर्चा अध्यक्ष श्रीमती योगिता सिंह, युवा मोर्चा अध्यक्ष वासु रूक्खड़ सहित प्रदेश पदाधिकारी उपस्थित थे एवं वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और सोशल मीडिया (Media) प्लेटफॉर्म के जरिए हजारों लोग जुड़े हुए थे.

केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी ने कृषि बिलों को लेकर विपक्षी पार्टियों द्वारा की जा रही ओछी राजनीति पर तंज कसते हुए कहा कि जब भी किसानों के हितों में कोई योजना बनाने का समय आता है तो उस पर विपक्षी पार्टियां राजनीति शुरू कर देती है. हर किसान का उद्देश्य होता उत्तम खेती, मध्यम व्यापार लेकिन दुर्भाग्यवश दशकों तक शासन करने के बाद भी कांग्रेस सरकार (Government) किसानों के लिए ऐसी योजना नहीं बनाई जिसके कारण किसान आगे बढ़ सके. आज देश के किसानों को कृषि बिल को लेकर गुमराह कर रही विपक्षी पार्टियां अपने गिरेबान में झांक कर देखें. उन्होंने बताया कि कांग्रेस सरकार (Government) के समय में कृषि बजट अधिकतम 14 हजार करोड़ तक होता था लेकिन मोदी सरकार (Government) ने कृषि बजट 1 लाख 34 हजार करोड़ है, यानी मोदी सरकार (Government) ने किसानों के लिए कांग्रेस सरकार (Government) से 10 गुना (guna) ज्यादा बजट देने का प्रावधान किया है. किसानों को डायरेक्ट बेनिफिट का लाभ मिले इसलिए किसान सम्मान निधि योजना के तहत उनके खाते में प्रतिवर्ष 6000 रुपए डाले जाते हैं, और कुल मिलाकर यह राशि 75,000 करोड़ है. कोरोना महामारी (Epidemic) के कारण हुए लॉकडाउन (Lockdown) के समय में जो आर्थिक पैकेज की घोषणा की गई थी उसमें भी 1 लाख करोड़ रुपए कृषि आधारित संरचना पर खर्च किए जाएंगे जो कृषि बजट के अतिरिक्त है.

श्री चौधरी ने कहा कि कृषि क्षेत्र में विकास और किसानों के हितों में कार्य करने की शुरुआत पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी के शासनकाल से हुआ, फसल बीमा योजना क्रेडिट कार्ड योजना जैसे जनकल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से किसानों को सुदृढ़ और उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की शुरुआत की गई, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आगे बढ़ाने का काम किया. आपदा को भी अवसर में बदलने का कार्य मोदी सरकार (Government) ने किया. लॉकडाउन (Lockdown) के दौरान किसानों को खाद, बीज, बुवाई कटाई के लिए विशेष छूट दी गई ताकि उनके खेतों में लगे हुए फसल प्रभावित न हो. किसानों को हेल्पलाइन नंबर की सुविधा दी गई, किसान रथ ऐप लांच की गई, 585 मंडियों को बढ़ाकर 1000 मंडियों के साथ जोड़ा गया. परिणाम स्वरूप पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष किसानों ने 45 प्रतिशत अधिक रिकॉर्ड फसल उत्पादन किया है. कृषि बिलों के माध्यम से मोदी सरकार (Government) की यही मंशा है कि देश के किसान आत्मनिर्भर बने और असल मायनों में किसानों को आजादी अब मिली है. पहले किसानों को मंडी परिधि के बाहर फसल बेचने की आजादी नहीं थी, जिसके कारण उन्हें ओने-पौने दाम में अपनी फसल को बेचना पड़ता था, कृषि बिल के माध्यम से किसानों को यह अधिकार मिला कि वह मंडी के बाहर भी अपनी फसल को बेच सकते हैं.

तीनों कृषि बिलों के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए श्री चौधरी ने कहा कि कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) विधेयक 2020 के माध्यम से किसानों को उनकी उपज के विक्रय की स्वतंत्रता प्रदान करते हुए ऐसी व्यवस्था का निर्माण होगा जहां किसान एवं व्यापारी कृषि उपज मंडी के बाहर भी अन्य माध्यम से भी उत्पादों का सरलतापूर्वक व्यापार कर सकेंगे. किसानों को अपने उत्पाद के लिए कोई उपकर नहीं देना होगा और उन्हें माल ढुलाई का खर्च भी वहन नहीं करना होगा. मंडियों के अतिरिक्त व्यापार क्षेत्र में फॉर्मगेट, कोल्ड स्टोरेज, वेयर हाउस, प्रसंस्करण यूनिटों पर भी व्यापार की स्वतंत्रता होगी. किसान खरीददार से सीधे जुड़ सकेंगे जिससे बिचैलियों को मिलने वाले लाभ के बजाए किसानों को उनके उत्पाद की पूरी कीमत मिल सके. कृषक (सशक्तिकरण एवं संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार विधेयक, 2020, कृषकों को व्यापारियों, कंपनियों, प्रसंस्करण इकाइयों, निर्यातकों से सीधे जोड़ना, कृषि करार के माध्यम से बुवाई से पूर्व किसान को मूल्य का आश्वासन, दाम बढ़ने पर न्यूनतम मूल्य के साथ अतिरिक्त लाभ भी किसानों को मिलेंगे. कृषि क्षेत्र में शोध और नई तकनीकी को बढ़ावा मिलेगा. आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक, 2020, इस बिल के माध्यम से किसानों की फसल को सही कीमत मिल सकेगी क्योंकि बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी. उन्होंने कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार (Government) ने जो अपने घोषणापत्र में कहा था वह पूरा कर रही है. 60 साल शासन करने के बाद भी जिन्होंने किसानों के हित के लिए कोई कदम नहीं उठाया उनके बहकावे में न आएं.

श्री गुप्ता ने कहा कि कृषि बिलों को लेकर विपक्षी पार्टियां राजनीतिक रोटियां सेकने का काम कर रही है, उन्होंने लोकसभा (Lok Sabha) राज्यसभा में भी हंगामा करने की कोशिश की और यह जताने की पुरजोर कोशिश की कि वह किसानों के हितैषी हैं. कृषि बिल का विरोध आम आदमी पार्टी भी कर रही है जिसकी सरकार (Government) दिल्ली में 6 वर्षों से है लेकिन आज तक उन्होंने किसानों को किसान का दर्जा नहीं दिया. जिसके कारण दिल्ली के किसान किसान सम्मान निधि योजना से आज तक वंचित है. दिल्ली में 70 में से 21 ऐसी विधानसभा क्षेत्र है जहां पर किसान और ग्रामीण पृष्ठभूमि के लोग रहते हैं और संवेदनहीन केजरीवाल सरकार (Government) ने उन्हें किसी भी प्रकार की सुविधा नहीं दी है. किसानों की आय को दोगुना (guna) करने की संकल्प के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई ऐतिहासिक फैसले लिए जैसे कि सॉइल हेल्थ कार्ड योजना, किसान क्रेडिट कार्ड योजना, एफपीओ का गठन, फसल बीमा योजना और डॉक्टर (doctor) स्वामीनाथन की रिपोर्ट जो कांग्रेस के कार्यकाल के दौरान तैयार की गई उसकी सिफारिशों को भी मोदी सरकार (Government) ने लागू किया. देश के किसान समृद्ध होंगे, तभी देश समृद्ध होगा, इसी उद्देश्य के साथ मोदी सरकार (Government) किसानों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए कृषि बिल लेकर आई है, जिसके माध्यम से किसान देश के आर्थिक तंत्र को मजबूत करेंगे. आज देश का किसान मोदी जी के साथ है और उनके निर्णय से खुश है.

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