Friday , 16 April 2021

ईओडब्ल्यू, लोकायुक्त में आईपीएस अफसर ही बन सकेंगे अब एसपी

भोपाल (Bhopal) . राज्य सरकार (State government) की जांच एजेंसी ईओडब्ल्यू और लोकायुक्त में अब किसी भी प्रमोटी अफसर को पदस्थ नहीं किया जाएगा. अखिल भारतीय पुलिस (Police) सेवा (आईपीएस) ही इन पोस्टों पर रहेंगे. आयकर छापों के बाद कालेधन के लेन-देन में उलझे अफसरों के मद्देनजर यह होगा. राज्य सरकार (State government) ने आईपीएस अफसरों के कैडर रिव्यू का प्रस्ताव केंद्रीय गृह मंत्रालय (Home Ministry) को भेज दिया है. इसमें ईओडब्ल्यू और लोकायुक्त के लिए एसपी की कैडर पोस्ट मांगी गई है. यहां बता दें कि छापों में फंसे प्रमोटी अधिकारी अरुण मिश्रा एसपी ईओडब्ल्यू रहे और लेन-देन में उनके नाम के आगे साढ़े सात करोड़ से अधिक राशि का जिक्र है. सूत्रों के मुताबिक कैडर रिव्यू में आईपीएस अधिकारियों की 39 नई पोस्ट मांगी गई हैं. अभी कैडर पोस्ट 166 हैं. पांच पोस्ट को सरेंडर भी किया गया है. इसमें स्पेशल डीजी पुलिस (Police) ट्रेनिंग मुख्यालय, आईजी होमगार्ड जबलपुर, आईजी पीटीआरआई, आईजी जेएनपीए सागर और आईजी आरएपीटीसी इंदौर (Indore) शामिल हैं.

2003 से पहले आईपीएस बनते थे एसपी

ईओडब्ल्यू और लोकायुक्त में 2003 से पहले आईपीएस ही पुलिस (Police) अधीक्षक बनाए जाते थे. भाजपा सरकार आने के बाद यह व्यवस्था बदली और राज्य पुलिस (Police) सेवा के प्रमोटी अफसरों को भी दोनों जांच एजेंसियों में एसपी बनाकर जिलों की कमान दी जाने लगी. पिछली कमलनाथ सरकार ने भी इसे बरकरार रखा. आयकर छापों के बाद सामने आए सबूतों के बाद सत्रह साल पुरानी व्यवस्था में वापस जाने की तैयारी है. छापों में सामने आए प्रमोटी अधिकारी अरुण मिश्रा छह-सात साल एसपी रहे.

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