Wednesday , 2 December 2020

26 नवंबर को देश भर से 10 लाख किसान दिल्ली पहुंचेंगे, 2 दिन तक दिल्ली में ‘घेरा डालो, डेरा डालो’ आंदोलन

इन्दौर . देशभर के 500 से ज्यादा किसान संगठनों के व्यापक समन्वय के लिए गठ‍ित ‘आल इंडिया किसान संघर्ष समन्वय समिति’ की वर्किंग कमेटी की सदस्य और नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेत्री सु मेधा पाटकर और अन्य किसान संगठनों व्दारा आज इन्दौर में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान देश के मजदूर, किसान एवं आम जनता से आगामी 26 नवम्बर को ‘देशव्यापी मजदूर-किसान हड़ताल’ को समर्थन देने और 26-27 नवम्बर को ‘किसान आंदोलन दिल्ली चलो..’ में भागीदारी की अपील की.

सु मेधा पाटकर ने कहा “कि केंद्र सरकार (Central Government)(Central Government) द्वारा हाल ही में कोरोना संक्रमण की आपदा को देशी विदेशी कारपोरेट के लिए मुनाफा कमाने के अवसर में तब्दील कर दिया है, देश के लाखों श्रमिकों के मूलभूत अधिकारों में कटौती करते हुये 44 से ज्यादा श्रम कानूनों को निरस्त कार आचार संहिता लागू कर पूंजीपतियों और उद्योग मालिकों के अनुरुप बना दिया है. वहीं कृषि सुधार के नाम पर तीन किसान विरोधी कानून संसद में अलोकतांत्रिक तरीके से पास किये गये हैं जिसके तहत पहले से ही बड़ी बड़ी कम्पनियों के मुनाफे के जाल में फंसा किसान अब पूरी तरह इन कम्पनियों की गिरफ्त में आ जायेगा. सु पाटकर ने कहा कि देश के कोने-कोने से 26 नवंबर को करीब 10 लाख से ज्यादा किसान दिल्ली पहुंचेंगे तथा ‘घेरा डालो, डेरा डालो आंदोलन’ करेंगे.

किसानों के इस आंदोलन का मजदूर संगठनों ने भी समर्थन किया है. उन्होंने बताया कि 26 नवंबर को होने वाली मजदूर हड़ताल का भी किसान संगठनों ने समर्थन किया है. इस तरह से पहली बार देश के किसान और मजदूर एक साथ केंद्र की सरकार के खिलाफ सड़कों पर आंदोलन कर रहे हैं. सु पाटकर ने बताया कि आवश्यक वस्तु संशोधन अधिनियम 2020 जैसे कानून जमाखोरी और कालाबाजारी को बढ़ा देंगे, जिससे आम उपभोक्ताओं के लिए रोजमर्रा की जरुरी चीजें और भी मंहगी हो जायेंगी. साथ ही नया बिजली संशोधन बिल 2020 बिजली के निजीकरण को बढ़ावा देगा और इसे मंहगा करेगा.

पत्रकार वार्ता में किसान संघर्ष समिति मालवा निमाड़ के संयोजक रामस्वरूप मंत्री ने कहा कि पहली बार देश के किसान और मजदूर एकजुट होकर नरेंद्र मोदी सरकार का विरोध कर रहे हैं इस सरकार ने वर्षों के संघर्ष के बाद हासिल किए गए श्रम कानूनों और श्रम अधिकारों को जमींदोज करते हुए श्रमिकों को बंधुआ बनाने की साजिश रची है. वहीं किसान और किसानी को बर्बाद करने का संकल्प लिया है. इसी के तहत पूरे देश में किसानों में आक्रोश है और 26व 27 तारीख को ‘घेरा डालो, डेरा डालो’ के तहत देश के कोने-कोने से लाखों किसान दिल्ली पहुंचेंगे.

महाराष्ट्र (Maharashtra) और निमाड़ से जाने वाले किसानों के जत्थे इन्दौर होकर गुजरेंगे. इन्दौर में सभी किसान संगठन मिलकर दिल्ली जाने वालों का स्वागत करेंगे. 24 नवंबर को सुबह 8:00 बजे अंबेडकर प्रतिमा गीता भवन चौराहे पर स्वागत किया जाएगा. अखिल भारतीय किसान सभा इन्दौर इकाई के सचिव अरुण चौहान ने बताया कि सभी केंद्रीय ट्रेड यूनियन मिलकर 26 तारीख को हड़ताल करेगी तथा इन्दौर के संभाग आयुक्त कार्यालय पर प्रदर्शन होगा. साथ ही 27 को किसान और मजदूर एकजुटता के साथ दिल्ली में तो भागीदारी करेंगे ही साथ ही स्थानीय स्तर पर भी एकजुटता प्रदर्शित करते हुए गांधी हाल में एकत्रित होंगे और संभाग आयुक्त कार्यालय पर प्रदर्शन करेंगे.

ऑल इंडिया किसान खेत मजदूर संगठन के प्रमोद नामदेव ने बताया कि सभी किसान संगठन के कार्यकर्ता मोदी सरकार द्वारा लाए गए जन विरोधी बिलों की जानकारी देने के लिए गांव-गांव में संपर्क कर रहे हैं. कोरोना काल को इस सरकार ने पूंजी पतियों के लिए अवसर बना दिया है, इसलिए किसान और मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ एकजुट होकर देश भर में विरोध हो रहा है.

अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस के जिला इकाई के सचिव कामरेड रूद्र पाल यादव ने बताया कि 26 और 27 तारीख को होने वाले किसान मजदूर आंदोलन में इन्दौर के मजदूर किसान बढ़-चढ़कर हिस्सेदारी करेंगे. साथ ही आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में भी 26 नवंबर को मुकम्मल बंद रखने का आव्हान मजदूरों से किया है. 26-27 नवंबर 2020 को पूरे देश भर में मजदूर किसान मिलकर इन मजदूर किसान विरोधी नीतियों का प्रतिरोध करेंगे. बड़वानी सेंधवा से होते हुए इन्दौर, देवास, गुना, ग्वालियर (Gwalior), आगरा (Agra) होते हुए दिल्ली के लिए बड़ी संख्या में किसान मजदूर पहुंचेंगे. इसी के साथ प्रदेश के हर गांव तहसील जिला स्तर पर इन कृषि कानूनों के खिलाफ प्रतिरोध किया जाएगा.

नेताओं ने बताया कि 26 एवं 27 नवंबर के आंदोलन का किसान संघर्ष समन्वय समिति से जुड़े संगठनों के अलावा मध्य प्रदेश किसान सभा, मध्य प्रदेश आदिवासी एकता महासभा, अखिल भारतीय खेत मजदूर यूनियन, हिंद मजदूर किसान पंचायत, सहित विभिन्न किसान और मजदूर संगठनों ने समर्थन किया है तथा किसान और मजदूरों से आंदोलन को कामयाब बनाने की अपील की है. साथ ही यह भी कहा कि हम आम जनता से अपील करते हैं कि इन काले कानूनों का बहिष्कार करें और मजदूर किसानों के पक्ष में इस आंदोलन के लिए हर संभव मदद करें.