मिड डे मील बनी अब पीएम पोषण योजना, गांव के बच्चे अब होंगे सेहतमंद – Daily Kiran
Thursday , 9 December 2021

मिड डे मील बनी अब पीएम पोषण योजना, गांव के बच्चे अब होंगे सेहतमंद

 

नई दिल्ली (New Delhi) . गरीब बच्चों के लिए सरकारी स्कूलों में चलाई जा रही मिड डे मील (मध्याह्न भोजन) योजना का नाम अब बदलकर पीएम पोषण योजना कर दिया गया है. पीएम पोषण स्कीम के तहत अब बाल वाटिका या प्री प्राइमरी क्लास के बच्चे भी शामिल किए जाएंगे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) की कैबिनेट ने बताया है कि देशभर के सरकारी स्कूल में अब तिथि भोजन नाम की एक परंपरा शुरू की जा रही है. इस सुविधा से आसपास के लोग किसी खास मौके या पर्व-त्यौहार पर स्कूल के बच्चों को विशेष भोजन उपलब्ध करा सकेंगे. इसके साथ ही मोदी कैबिनेट ने फैसला किया है कि स्कूल में न्यूट्रिशन गार्डन बनाए जाएंगे. इसमें उगी हुई सब्जियां छात्रों को मिड डे मील में खिलाई जाएंगी. इसके साथ ही बच्चों के मिड डे मील स्कीम से फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन (एफपीओ) और विमेन सेल्फ हेल्प ग्रुप को जोड़ा जाएगा. इन सभी के साथ एथनिक कुजीन और इनोवेटिव मीनू बनाकर स्कूली बच्चों में पोषण की समस्या को दूर किया जाएगा.

पीएम पोषण स्कीम में यह सभी चीजें पहली बार शामिल की गई है. वास्तव में मोदी कैबिनेट ने मिड डे मील स्कीम को नया रूप देते हुए इसमें नए भागीदारों को शामिल करने और इसे और समृद्ध बनाने की शुरुआत की है. देशभर के सरकारी स्कूलों में जगह की कमी नहीं है. आम तौर पर ग्रामीण और कस्बाई इलाके के स्कूलों के पास बड़े कैंपस के साथ ही एक बड़ा प्लेग्राउंड भी होता है. सरकार स्कूल की खाली जमीन का उपयोग सब्जियों की खेती के लिए करना चाहती है. स्कूल कैंपस में मौजूद जगह में सब्जी के पौधे लगाए जा सकते हैं और उनसे सीजनल सब्जियां उगाई जा सकती हैं. इस तरह की हरी सब्जियां बच्चों के लिए शारीरिक विकास में काफी मददगार साबित हो सकती हैं. मिड डे मील में इस समय आमतौर पर मोटे अनाज, खिचड़ी या इस तरह की चीजें ही दी जाती हैं. कई इलाकों में जहां खाना पकाने की समस्या है या खाना पकाने के लिए लोग उपलब्ध नहीं है, वहां बच्चों को चावल-गेहूं या दलिया अनाज के रूप में ही दे दिया जाता है. बच्चे उसे अपने घर ले जाते हैं और उनके माता-पिता अपनी सुविधा के हिसाब से उसे तैयार कर बच्चों को खिलाते हैं. स्कूल में न्यूट्रिशन गार्डन बनाने का उद्देश्य है कि इससे बच्चों को फ्री में सब्जियां उपलब्ध होंगी और उनके विकास के लिए जरूरी पोषक तत्व मिल पाएंगे.
पीएम पोषण योजना पांच वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक के लिए है जिस पर 1.31 लाख करोड़ रुपये का खर्च आयेगा. केंद्र सरकार (Central Government)99,061 करोड़ रुपए का खर्च वहन करेगी जिसमें खाद्यान्न की लागत भी शामिल है. उन्होंने बताया कि अभी तक देश में मध्याह्न भोजन योजना चल रही थी और मंत्रिमंडल ने इसे नया स्वरूप दिया है. सीसीईए ने इसे पीएम पोषण योजना के रूप में मंजूरी दी है. पिछले साल उत्‍तर प्रदेश के प्राइमरी स्कूल में मिलने वाले मिड डे मील में स्कूल में उगी सब्जियों का इस्तेमाल करने की योजना बनी थी. इसका उद्देश्य सब्जियों के स्वाद के साथ बच्चों में पोषण बढ़ाने के अलावा उन्‍हें पर्यावरण से भी जोड़ना था. केंद्र सरकार (Central Government)की स्कूल न्यूट्रिशन गार्डन योजना के तहत प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग ने प्रदेश के प्राइमरी स्कूलों में पोषण वाटिका या किचन गार्डन बनाने की कवायद शुरू की थी. स्कूलों में इसके लिए जगह चिह्नित कर पोषण वाटिका उगाने के निर्देश भी जारी कर दिए गए थे. इस पोषण वाटिका के रख-रखाव की जिम्मेदारी छात्रों को दी गई है.

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