मंत्री बनने के मोह में न पड़कर चिराग पासवान ने बिहार के लाभ के लिए स्वतंत्र रूप से लड़ा विस चुनाव – Daily Kiran
Saturday , 4 December 2021

मंत्री बनने के मोह में न पड़कर चिराग पासवान ने बिहार के लाभ के लिए स्वतंत्र रूप से लड़ा विस चुनाव

नई दिल्ली (New Delhi) . मंत्री बनने के मोह में न पड़कर चिराग पासवान ने बिहार (Bihar) के लाभ के लिए स्वतंत्र रूप से विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) लड़ा यह कहना है लोकजन शक्ति पार्टी (रामविलास) के मुखिया चिराग पासवान के निकट सहयोगी सौरभ पांडेय का. सौरभ पांडेय कहा कि उन्होंने (चिराग) केंद्र की भारतीय जनता पार्टी नीत सरकार में मंत्री बनने का मोह नहीं किया और उन्होंने बिहार (Bihar) के भले के लिए विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) स्वतंत्र रूप से लड़ा था. पांडेय ने यह भी कहा कि चिराग अब अपने आप में एक नेता के तौर पर उभर कर सामने आए हैं. चिराग के चाचा और केंद्रीय मंत्री पशुपति कुमार पारस के नेतृत्व वाली पार्टी ने मूल लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) में विभाजन के लिए चिराग की पांडेय से निकटता को दोषी ठहराया है. पांडेय ने पारस को एक सार्वजनिक पत्र लिखा है. इसमें उन्होंने कहा कि लोजपा को भाजपा-जनता दल (यू) गठबंधन के हिस्से के तौर पर चुनाव लड़ने के लिए सिर्फ 15 सीटों की पेशकश की गई थी. उन्होंने दावा किया कि पारस भी इस समझौते के खिलाफ थे और तब चिराग ने “बिहार (Bihar) फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट” एजेंडे पर स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने का फैसला किया.

पांडेय ने कहा कि लोजपा केवल एक ही सीट जीत सकी, लेकिन उसने कई सीटों पर जद (यू) की संभावनाओं को नुकसान पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी. लोजपा को जो भी वोट मिले, उसे उसके एजेंडे के लिए मिले, जबकि केवल चुनाव जीतने के लिए राज्य में गठबंधन बने थे. पांडेय ने लोजपा संस्थापक रामविलास पासवान का जिक्र करते हुए कहा कि विधायक और सांसद (Member of parliament) हजारों की संख्या में हैं, लेकिन नेता कुछ ही हैं तथा दिवंगत दलित नेता के पुत्र चिराग अब अपने आप में एक नेता के रूप में उभर कर सामने आए हैं. पारस को पार्टी को विभाजित करने के लिए लोजपा के छह में से पांच सांसदों का समर्थन मिला था और चुनाव आयोग ने उनके नेतृत्व वाले धड़े को राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी नाम दिया है.
 

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