Saturday , 11 July 2020
कोर्ट के 37 लाख मामलों पर कोई कार्रवाई नहीं

कोर्ट के 37 लाख मामलों पर कोई कार्रवाई नहीं


नई दिल्ली (New Delhi) . पूरे भारत में हाईकोर्ट, जिला कोर्ट और तालुका कोर्ट के समक्ष कुल तीन करोड़ 77 लाख मामलों में से करीब 37 लाख मामले पिछले 10 सालों से लंबित पड़े हुए हैं. यह जानकारी राष्ट्रीय न्यायिक डाटा ग्रिड (एनजेडीजी) ने दी है, जो राष्ट्रीय स्तर पर अदालतों द्वारा किए जा रहे कार्यों की निगरानी करता है. इसमें 28 लाख मामले जिला और तालुका अदालत में लंबित हैं. वहीं, 9,20,000 केस हाईकोर्ट में लंबित हैं. दूसरी तरफ, इस डाटा से पता चला है कि 6,60,000 से ज्यादा मामले पिछले 20 सालों से लंबित हैं. इसके अलावा 30 सालों से लंबित पड़े केस की संख्या 1,31,000 है.

सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) ने 15 जून को हाईकोर्ट में लंबित पड़े मामलों पर दुख जताया था. दरअसल, वह एक हत्या (Murder) के दोषी की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जबकि उसकी सजा के खिलाफ उसकी अपील इलाहाबाद हाईकोर्ट के समक्ष लंबित है. सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) ने त्वरित सुनवाई के अधिकार को नोट किया और पाया कि इससे आपराधिक अपीलों का त्वरित निपटान होगा. यदि इस तरह की अपीलों पर उचित समय के भीतर सुनवाई नहीं की जाती हैं, तो अपील का अधिकार स्वयं भी भ्रामक हो जाएगा. सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) ने इलाहाबाद, राजस्थान (Rajasthan), मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) , पटना, ओडिशा, राजस्थान (Rajasthan), बॉम्बे उच्च न्यायालयों से लंबित आपराधिक अपीलों को तय करने के लिए एक विस्तृत कार्ययोजना प्रस्तुत करने को कहा.

लंबित मामलों के मामले में जिला अदालतें उच्च न्यायालयों से बेहतर हैं. देश भर में 25 उच्च न्यायालयों के समक्ष 47 लाख से अधिक मामले लंबित हैं. इनमें से 9,20,000 से अधिक मामले 10 से अधिक वर्षों से लंबित हैं और 158,000 मामले 20 से अधिक वर्षों से, वहीं 46,754 तीन दशक या उससे अधिक समय से लंबित हैं.