नई दिल्ली, 26 नवंबर . मच्छरों से फैलने वाले मलेरिया के लिए लेट-लिवर-स्टेज वैक्सीन पर आधारित एक छोटे क्लीनिकल ट्रायल में यह पाया गया कि यह वैक्सीन सुरक्षित और प्रभावी है. मलेरिया बीमारी हर साल दुनियाभर में लगभग 6,08,000 लोगों की जान लेती है.
नीदरलैंड के लीडन यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर और रैडबाउड यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए इस ट्रायल में यह देखा गया कि एक जेनेटिकली मॉडिफाइड प्लाज्मोडियम फाल्सीपेरम पैरासाइट से टीकाकरण करने पर सकारात्मक इम्यून प्रतिक्रिया उत्पन्न हुई और मलेरिया से सुरक्षा मिली. इसे जीए2 कहा जाता है.
इस अध्ययन में 25 स्वस्थ वयस्कों को शामिल किया गया, जिन्हें पहले कभी मलेरिया नहीं हुआ था. उन्हें एक आनुवंशिक रूप से संशोधित पी. फाल्सीपेरम पैरासाइट (जीए2) के साथ टीकाकरण करने के लिए चुना गया, जिसे यकृत में लंबे समय तक विकसित करने के लिए डिज़ाइन किया गया था.
10 प्रतिभागियों को जीए2 समूह में, 10 को जीए1 समूह में और 5 को प्लेसबो समूह में रखा गया. प्रत्येक समूह में पुरुष और महिला दोनों शामिल थे.
तीनों समूहों को तीन बार 28 दिन के अंतराल पर टीकाकरण दिया गया. इस दौरान जीए2 और जीए1 समूहों के प्रतिभागियों को पी. फाल्सीपेरम पैरासाइट से संक्रमित मच्छरों के संपर्क में लाया गया, जबकि प्लेसबो समूह के मामले में असंक्रमित मच्छरों के संपर्क में आना शामिल था.
अंतिम टीकाकरण के तीन हफ्ते बाद सभी प्रतिभागियों को नियंत्रित मलेरिया संक्रमण के संपर्क में लाया गया, ताकि यह देखा जा सके कि वैक्सीन कितनी सुरक्षा प्रदान करती है.
परिणाम न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित हुए, जिसमें पाया गया कि जीए2 समूह के 89% प्रतिभागियों को मलेरिया से सुरक्षा मिली. जीए1 समूह में यह आंकड़ा केवल 13% था. प्लेसबो समूह में किसी को भी सुरक्षा नहीं मिली.
इसके अलावा, जीए2 समूह के किसी भी प्रतिभागी को टीकाकरण के बाद मलेरिया का संक्रमण नहीं हुआ, जिससे यह साबित होता है कि यह वैक्सीन सुरक्षित है.
शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि जीए2 समूह ने मजबूत इम्यून प्रतिक्रिया (प्रो-इन्फ्लेमेटरी रिस्पांस) दिखाई. जीए2 और जीए1 दोनों ने समान स्तर के एंटीबॉडी बनाए, लेकिन जीए ने अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान की. इसका कारण मुख्य रूप से सेलुलर इम्यून सिस्टम की प्रतिक्रिया को माना गया.
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