नेपाल सरकार ने विवादास्पद सोशल मीडिया विधेयक वापस लिया

काठमांडू, 3 फरवरी . नेपाल की अंतरिम Government ने Tuesday को संसद में लंबित social media विधेयक को वापस लेने का फैसला किया. यह विधेयक पूर्व Prime Minister के.पी. शर्मा ओली के नेतृत्व वाली Government द्वारा पेश किया गया था और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को सीमित करने के आरोपों के चलते व्यापक आलोचना का सामना कर रहा था.

यह फैसला उस पृष्ठभूमि में आया है, जब सितंबर में ओली Government द्वारा social media पर लगाए गए प्रतिबंध के खिलाफ जेन-जी के नेतृत्व में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे. ये प्रदर्शन बाद में व्यापक भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन में तब्दील हो गए, जिसके परिणामस्वरूप ओली Government को सत्ता से हटना पड़ा.

Government के प्रवक्ता और गृह मंत्री ओम प्रकाश आर्याल ने पत्रकारों को बताया कि मंत्रिमंडल की बैठक में संसद से social media विधेयक वापस लेने का निर्णय लिया गया है.

इस विधेयक का उद्देश्य social media प्लेटफॉर्म्स को विनियमित करना था. Government का तर्क था कि वर्ष 2023 में लागू ‘सोशल नेटवर्क उपयोग प्रबंधन निर्देश’ पर्याप्त नहीं हैं.

सितंबर की शुरुआत में ओली Government ने नियामकीय प्रावधानों के तहत पंजीकरण न कराने का हवाला देते हुए कई social media प्लेटफॉर्म्स- मेटा (फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप), अल्फाबेट (यूट्यूब), एक्स (पूर्व में ट्विटर), रेडिट और लिंक्डइन पर प्रतिबंध लगा दिया था.

हालांकि, इस फैसले के खिलाफ युवाओं के नेतृत्व में तीव्र विरोध हुआ, जो बाद में Government विरोधी और भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन में बदल गया. इसके बावजूद, ओली Government द्वारा पेश किया गया social media विधेयक संसद के उच्च सदन में लंबित रहा, जिसमें कई ऐसे प्रावधान थे जिनसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश लगने की आशंका जताई जा रही थी.

नेपाल पत्रकार महासंघ सहित डिजिटल अधिकार संगठनों ने विधेयक के कई प्रावधानों की कड़ी आलोचना की थी. सबसे विवादास्पद धाराओं में social media के दुरुपयोग पर सजा से जुड़ा प्रावधान शामिल था.

विधेयक में लगभग एक दर्जन ऐसे अपराधों की सूची दी गई थी, जिनके तहत उपयोगकर्ताओं पर भारी जुर्माना और जेल की सजा का प्रावधान था. फर्जी पहचान का इस्तेमाल कर गलत या भ्रामक जानकारी फैलाने वालों को सबसे कठोर दंड का सामना करना पड़ सकता था, जिसमें पांच साल तक की कैद और 15 लाख नेपाली रुपये तक का जुर्माना शामिल था.

विधेयक में यह भी कहा गया था कि कोई भी व्यक्ति नेपाल की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता या राष्ट्रीय हित के खिलाफ झूठी या भ्रामक जानकारी फैलाने के उद्देश्य से छद्म या अस्थायी पहचान का उपयोग नहीं कर सकता.

इसके अलावा, social media प्लेटफॉर्म्स के लिए Governmentी लाइसेंस लेना अनिवार्य करने का प्रस्ताव था. बिना लाइसेंस संचालन करने पर 25 लाख नेपाली रुपये तक का जुर्माना तय किया गया था.

विधेयक में साइबर बुलिंग, स्किमिंग, फिशिंग, पहचान की ठगी, सेक्सटॉर्शन और social media के माध्यम से होने वाले अन्य अपराधों के लिए भी सख्त सजा का प्रावधान किया गया था.

डीएससी

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