Wednesday , 22 January 2020
अमेरिका की मध्य-पूर्व नीति को नाटो का समर्थन, कहा आतंकी समूहों को मदद देना बंद करे ईरान

अमेरिका की मध्य-पूर्व नीति को नाटो का समर्थन, कहा आतंकी समूहों को मदद देना बंद करे ईरान

ब्रुसेल्स . ड्रोन हमले से ईरान की कुद्स फोर्स के प्रमुख जनरल कासिम सुलेमानी की हत्या करने पर जहां इस्लामिक देश अमेरिका के खिलाफ एकजुट हो गए हैं, वहीं उत्‍तरी एटलांटिक संधि संगठन यानी नाटो (नाटो) ने कहा है कि वह मध्य पूर्व में संयुक्त राज्य अमेरिका की नीतियों का समर्थन करता है और ईरान द्वारा विभिन्न आतंकवादी समूहों के समर्थन की निंदा करता है.

नाटो देशों के राजदूतों की मुख्‍यालय ब्रुसेल्स में हुई बैठक में क्षेत्र के मौजूदा हालातों पर चर्चा हुई. बैठक के बाद नाटो महासचिव जेन स्टोलटेनबर्ग ने ईरान से मध्‍य पूर्व क्षेत्र में तनाव कम करने की गुजारिश की. जेन स्टोलटेनबर्ग ने कहा हम विभिन्न आतंकी समूहों के ईरान के समर्थन की निंदा करते हैं.

बैठक में नाटो सदस्‍यों ने मध्‍य पूर्व में तनाव कम करने और संयम बरतने का आह्वान किया. उन्‍होंने कहा कि एक नया संघर्ष किसी के भी हित में नहीं होगा. ईरान को हिंसा और उकसावे की कार्रवाई से बचना चाहिए. बैठक के दौरान फ्रांस, जर्मनी एवं अन्य सदस्‍यों ने इराक में सैन्‍य अभियान जारी रखने पर सहमति जताई.

बता दें कि नाटो 29 उत्तरी अमेरिकी एवं यूरोपीय देशों का एक अंतर-सरकारी सैन्य गठबंधन है. नाटो इराक मिशन का गठन 2018 में आतंकी संगठन आईएस के खिलाफ तीन साल के युद्ध के बाद किया गया था. इसमें सदस्‍य देशों के सैकड़ों प्रशिक्षक, सलाहकार एवं सहायक कर्मचारी काम करते हैं. उल्‍लेखनीय है कि बगदाद हवाईअड्डे के पास बीते शुक्रवार को अमेरिकी एयर स्‍ट्राइक में ईरानी जनरल कासिम सुलेमानी (62) की मौत हो गई थी. इस घटना के बाद ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ गया है और युद्ध की आशंका पैदा हो गई है.

ऐसे में विभिन्न देशों में इसे लेकर चिंता है. विभिन्‍न वैश्विक संस्‍थाओं द्वारा दोनों देशों से तनाव कम करने का आह्वान किया जा रहा है. ईरान ने अपने कमांडर की मौत का बदला लेने की बात कही है, तो वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने धमकी दी है कि यदि ईरान ने अमेरिका के किसी ठिकाने को निशाना बनाया गया तो इसके गंभीर नतीजे सामने आएंगे.