नई दिल्ली, 3 अप्रैल . लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने वक्फ संशोधन बिल का लगातार विरोध किया. लेकिन, लोकसभा में इस मुद्दे पर हो रही चर्चा में उन्होंने भाग नहीं लिया. राहुल गांधी के इस रवैये पर गुरुवार को मुस्लिम नेताओं ने न्यूज एजेंसी से बात करते हुए निराशा व्यक्त की.
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) के सदस्य मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली और ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएसपीएलबी) के महासचिव मौलाना यासूब अब्बास ने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि विपक्ष के नेता राहुल गांधी मुस्लिम समुदाय की ओर से लोकसभा में बोलेंगे.
दरअसल, बुधवार को, विपक्ष के नेता राहुल गांधी वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं और सांसदों के साथ बैठक के लिए संसद में उपस्थित थे, ताकि संशोधनों पर पार्टी के रुख पर चर्चा की जा सके. हालांकि, वह बैठक के तुरंत बाद चले गए, स्पष्ट रूप से महत्वपूर्ण वक्फ बहस से अनुपस्थित रहने का फैसला किया. बाद में वे मतदान के लिए उपस्थित हुए, चर्चा के दौरान उनकी अनुपस्थिति के लिए उन्हें आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है.
से बात करते हुए मौलाना महली ने कहा, “मुझे आश्चर्य हुआ कि लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष ने सदन में इसको लेकर कोई बयान नहीं दिया. मुझे उम्मीद है कि कांग्रेस पार्टी उचित बयान जारी करेगी.”
मौलाना अब्बास ने कहा, “राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को बयान देना चाहिए था. मुझे उम्मीद थी कि प्रियंका गांधी आएंगी और वक्फ बिल के खिलाफ वोट देंगी, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया.”
उन्होंने आगे कहा, “हमें प्रियंका गांधी में इंदिरा गांधी दिखती हैं. कांग्रेस का मुसलमानों को समर्थन करने और उनके लिए बोलने का इतिहास रहा है. पार्टी ने विधेयक के खिलाफ मतदान किया, लेकिन मैं लोकसभा में राहुल गांधी को बोलते हुए सुनना चाहता था.”
दोनों मुस्लिम नेताओं ने गुरुवार को राज्यसभा में वक्फ विधेयक पेश किए जाने पर भी प्रतिक्रिया व्यक्त की, उन्होंने कहा कि यदि विधेयक वहां भी पारित होता है, तो वे सर्वोच्च न्यायालय से हस्तक्षेप की मांग करेंगे.
बता दें कि ऐतिहासिक वक्फ (संशोधन) विधेयक बुधवार को लोकसभा में 13 घंटे की लगातार बहस के बाद 288 सदस्यों के पक्ष में और कुल 232 सदस्यों के विरोध में वोटिंग होने के बाद पारित हुआ.
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एससीएच/जीकेटी