Friday , 25 June 2021

नगर निगम का जोनल अधिकारी और टाइम कीपर ५० हजार रुपए की रिश्वत लेते गिरफ्तार

ग्वालियर (Gwalior) . नगर निगम में गिना घूस के कोई काम नही हो रहा है. ईओडब्लू ने दोपहर नगर निगम के जोन क्रमांक-14 के जोनल ऑफिसर और टाइम कीपर को शारदा विहार स्थित नगर निगम कार्यालय में 50 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा है. ईओडब्लू ने आरोपियों को गिरफ्तार कर भ्रष्टाचार अधिनियम के तहम मामला दर्ज कर लिया है.

जानकारी के अनुसार सिकंदर कंपू निवासी अनूप कुशवाह के दोस्त की एक बीघा जमीन झांसी रोड कोटे के सराय में हैं. यहां वर्ष 2018 में अनूप ने कॉलोनी काटी थी. करीब 8 मकान वहां बन चुके हैं और 10 प्लॉट पर मकान बनने का काम शुरू हो चुका है. जो मकान बन गए हैं वह नगर निगम में सभी तरह के टैक्स भी भर रहे हैं. यह जगह नगर निगम के जोन क्रमांक-14 में आती है. जोन-14 का ऑफिस सिटी सेंटर शारदा विहार में है. जोनल ऑफिसर मनीष कन्नौजिया हैं. लॉकडाउन (Lockdown) के बाद से जोनल ऑफिसर मनीष लगातार कॉलोनी के लोगों को परेशान कर रहे हैं. वह कॉलोनी में जाकर मकान और जमीन को अवैध बताकर तोड़ने की धमकी देते हैं.

जब प्रॉपर्टी कारोबारी अनूप कुशवाह ने जोनल ऑफिसर से बात की तो उन्होंने धमकाया और मकान तोड़ने की कार्रवाई रोकने के बदले 3 लाख रुपए की रिश्वत मांगी थी. अनूप ने किसी तरह उनको समझाया तो वह 2 लाख रुपए में पूरा मामला निपटाने के लिए तैयार हुआ. चार किश्तों में यह रकम देना तय हुआ. 50 हजार रुपए अनूप पहले दे चुके थे. पर दूसरी किश्त में देरी होने पर जोनल ऑफिसर बीते 3 दिन से वहां मकान बनाकर रहने वालों को काफी परेशान कर रहा था. यहां तक नोटिस भी दे आया था.इस पर अनूप ने उसे सबक सिखाने के लिए ईओडब्लू एसपी अमित सिंह से मिलकर मामले की शिकायत की. उन्होंने पूरे मामले को तैयार किया. पूरी योजना के साथ शुक्रवार (Friday) को अनूप सिंह को पचास हजार रुपए लेकर शारदा विहार स्थित नगर निगम कार्यालय में पहुंचाया गया. जहां पर रिश्वत लेते ही ईओडब्लू की टीम ने दबिश दी और जेडओ मनीश कन्नोजिया व टाइम कीपर इंदर सिंह को दबोच लिया. जेड ओ मनीष ने रिश्वत के रुपए हाथ में लेकर इंदर के हाथ में दे दिए थे. जब इंदर रुपए गिन रहा था तोईओडब्लू की टीम ने दोनों से रुपए बरामद कर उनके खिलाफ प्रकरण दर्ज कर लिया है.

जानकारी रहे कि इसी तरह करीब तीन माह पूर्व ईओडब्लू की टीम ने नगर निगम के सिटी प्लानर प्रदीप वर्मा को चलती कार में 5 लाख रुपए की रिश्वत लेते हुए ट्रैप किया था. उसके बाद नगर निगम से कई महत्वपूर्ण कॉलोनियों की गुम फाइल का मामला भी खुला था. विश्वविद्यालय थाना में इघ्R भी दर्ज की गई थी. उसके घर पर भी लाखों का माल मिला था.

 

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