हाईकोर्ट की सख्ती के आगे झुका नगर निगम, सपा पार्षद को दिलाई गई शपथ

Lucknow, 24 मई . उत्तर प्रदेश की राजधानी Lucknow में वार्ड संख्या-73 फैजुल्लागंज (तृतीय) से निर्वाचित Samajwadi Party के पार्षद ललित किशोर तिवारी को आखिरकार Sunday को नगर निगम मुख्यालय में शपथ दिला दी गई. उच्च न्यायालय के आदेश के बाद लंबे समय से लंबित यह प्रक्रिया आखिरकार पूरी हो गई.

शपथ ग्रहण के लिए ललित किशोर तिवारी निर्धारित समय पर नगर निगम पहुंचे, जहां अधिकारियों की मौजूदगी में औपचारिकताएं पूरी कराई गईं. शपथ लेने के बाद उनके समर्थकों ने फूल-मालाओं से स्वागत किया और खुशी जाहिर की. शपथ ग्रहण के बाद ललित किशोर तिवारी ने कहा उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था.

उन्होंने कहा कि इस पूरे संघर्ष में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, लेकिन अंततः कानून की जीत हुई. वह क्षेत्र की समस्याओं के समाधान और पूरी निष्ठा से कार्य करेंगे.

ज्ञात हो कि इलाहाबाद हाईकोर्ट की Lucknow खंडपीठ की सख्ती और महापौर के अधिकार सीज किए जाने के बाद नगर निगम प्रशासन हरकत में आया. अदालत ने हाल ही में कड़ा रुख अपनाते हुए कहा था कि यदि 29 मई तक शपथ ग्रहण नहीं कराया गया तो महापौर सुषमा खर्कवाल को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होना पड़ेगा. कोर्ट ने इस मामले में महापौर के प्रशासनिक और वित्तीय अधिकार भी अस्थायी रूप से स्थगित कर दिए थे.

दरअसल, यह पूरा मामला नगरीय निकाय चुनाव-2023 से जुड़ा है. वार्ड संख्या-73 फैजुल्लागंज (तृतीय) से भाजपा प्रत्याशी प्रदीप कुमार शुक्ला उर्फ टिंकू शुक्ला ने चुनाव जीता था. उन्हें 4972 मत मिले थे, जबकि Samajwadi Party के प्रत्याशी ललित किशोर तिवारी को 3298 वोट प्राप्त हुए थे. चुनाव परिणाम के बाद ललित तिवारी ने अदालत में याचिका दायर कर आरोप लगाया कि भाजपा प्रत्याशी ने नामांकन पत्र के साथ दाखिल शपथ पत्र में वैवाहिक स्थिति को लेकर अधूरी और भ्रामक जानकारी दी थी.

मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की Lucknow खंडपीठ ने 19 दिसंबर 2025 को भाजपा प्रत्याशी का निर्वाचन निरस्त कर दिया और दूसरे स्थान पर रहे ललित किशोर तिवारी को निर्वाचित पार्षद घोषित कर दिया. अदालत के इस फैसले को चुनौती देते हुए मामला Supreme Court तक पहुंचा, लेकिन वहां भी राहत नहीं मिली. इसके बावजूद नगर निगम स्तर पर शपथ ग्रहण की प्रक्रिया लंबित रही. ललित किशोर तिवारी लगातार जिलाधिकारी और महापौर को पत्र लिखकर शपथ ग्रहण कराने की मांग करते रहे.

लंबे इंतजार के बाद जब मामला दोबारा हाईकोर्ट पहुंचा तो अदालत ने नगर निगम प्रशासन और महापौर के रवैये पर नाराजगी जताई. अदालत ने साफ कहा कि न्यायालय के आदेश का पालन न करना गंभीर विषय है. Thursday को सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति कमर हसन रिजवी की पीठ ने कहा था कि जब तक निर्वाचित पार्षद को शपथ नहीं दिलाई जाती, तब तक महापौर के सभी प्रशासनिक और वित्तीय अधिकार स्थगित रहेंगे.

अदालत ने यह भी निर्देश दिया था कि महापौर का कार्यभार जिलाधिकारी और नगर आयुक्त संभालेंगे. अदालत की सख्ती के बाद महापौर सुषमा खर्कवाल ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अस्पताल में भर्ती होने की जानकारी दी थी. बाद में Saturday को अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद उन्होंने Sunday सुबह शपथ ग्रहण कराने की बात कही. इसी बीच नगर निगम प्रशासन ने मामले में विधिक राय भी ली.

विकेटी/एएस

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