Friday , 16 April 2021

मुंबई पुलिस ने ड्रग तस्करों के नए-नए कोड वर्ड्स का किया खुलासा


मुंबई (Mumbai) , . मुंबई (Mumbai) पुलिस (Police) ने नए साल के मद्देनजर मुंबई (Mumbai) में होने वाली पार्टियों को ड्रग्स से बचाने के लिए ड्रग्स पेडलर्स पर काफी हद तक नकेल कसी हुई है. पहले पुलिस (Police) ड्रग्स तस्करों को पकड़ने के लिए ह्यूमन इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करती थी तो अब ड्रग्स तस्करों पर अंकुश लगाने के लिए सोशल मीडिया (Media) पर भी नजर बनाए हुए है.

मुंबई (Mumbai) पुलिस (Police) के जॉइंट कमिश्नर मिलिंद भराम्बे कहते हैं कि पिछले तीन महीने में क्राइम ब्रांच ने लगभग 10 करोड़ रुपये के ड्रग्स पकड़े हैं. जिसमे हीरोइन, एमडीएमए, चरस, अम्फेटामाइन, एलएसडी जैसे कई ड्रग्स का समावेश है. पुलिस (Police) का कहना है कि ड्रग्स तस्कर पहले की तरह अब फोन का इस्तेमाल नहीं करते अब एजेंसियों से बचने के लिए आधुनिक युग के अनुसार सोशल मीडिया (Media) , नए नए एप्लिकेशन, का इस्तेमाल कर रहे हैं.

लॉकडाउन (Lockdown) के समय मुंबई (Mumbai) से बाहर और अंदर आने के लिए सिर्फ उन्हीं गाड़ियों को अनुमति थी जो कि अत्यावश्यक सर्विस में आती हों या फिर जिसे पुलिस (Police) की तरफ से इजाजत मिली हो. पुलिस (Police) की माने तो उनकी जांच में पता चला कि ड्रग्स तस्कर ह्यूमन चैन का इस्तेमाल ड्रग्स की तस्करी के लिए कर रहे हैं. ड्रग्स कोई एक शख्स मुंबई (Mumbai) में नहीं लाता. एक बार में ड्रग्स के खेप मुंबई (Mumbai) लाने के लिए 5 से 7 बार आदमी और गाड़ियां बदली जाती है. जिससे जांच एजेंसियों को उन पर शक ना हो.

क्या है ड्रग्स के कोड वर्ड्स-

बदलते जमाने के साथ तस्करों ने ड्रग्स के नाम भी बदल दिया- एक मीटर कपड़ा यानी एक किलो एमडीएमए. दो मीटर कपड़ा यानी दो किलो एमडीएमए. छोटे ग्राहक एमडीएमए को हैप्पी पिल्स के नाम से संबोधित करते हैं. एक पॉट यानी एक किलो गांजा. एक चिबा यानी एक किलो चरस. स्मैक यानी हीरोइन. जादू की पुड़िया भी हीरोइन को बोला जाता है. एम्फेटामाइन को आइस नाम से जाना जाता है. चरस को क्रीम नाम दिया गया है.

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