Monday , 19 April 2021

कोरोना काल में रोजगार देने में मप्र पहले पायदान पर

भोपाल (Bhopal) . कोरोना काल में पूरे देशभर से अपने गृह राज्य में वापस लौटने वाले मजदूरों, श्रमिकों को उनके खुद के गांव में रोजगार उपलब्ध कराने में मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) पूरे देश में टॉप पर है. केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा नव वर्ष में जारी की गई रैंकिंग में मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) सारे राज्यों को पीछे छोड़कर सबसे ऊपर आ गया है. पूरे देश में इस समय दो लाख 68 हजार 604 पंचायतों में से 1 लाख 59 हजार 448 पंचायतों में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत कुल 59 फीसदी पंचायतों में मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराए गए हैं. मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) से हर साल काफी संख्या में मजदूर राजस्थान, हरियाणा (Haryana) , छत्तीसगढ़, गुजरात (Gujarat), महाराष्ट्र (Maharashtra) जैसे राज्यों में अच्छी मजदूरी मिलने की उम्मीद के साथ काम करने जाते हैं. लेकिन मार्च 2020 से पूरे देशभर में फैली कोरोना महामारी (Epidemic) से ये इन मजदूरों की आजीविका भी प्रभवित हुई है. मप्र में भी लाखों की संख्या में अन्य राज्यों से मजदूर मप्र वापस लौटे हैं. अभी भी देशभर में कोरोना का प्रकोप बढ़ता ही जा रहा है. ऐसे में ये मजदूर मप्र में ही रोजगार और आजीविका की तलाश में थे. इन सभी मजदूरों को आत्मनिर्भर बनाने और मप्र में ही रोजगार दिलाने में मनरेगा की महती भूमिका रही है.
वहीं मप्र पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव मनोज श्रीवास्तव का कहना है कि मनरेगा के तहत ग्राम पंचायतों में मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराने में मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) पूरे देश में अव्वल है. ग्रामीण विकास मंत्रालय की ताजा रैंकिंग में इसे देखा जा सकता है. हम यहां हर तरह के कामों से मजदूरों को जोड़ रहे है.

मप्र में किए गए 12 लाख काम

पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने मप्र की 97 फीसदी यानि 22 हजार 162 ग्राम पंचायतों में रहने वाले इन मजदूरों को काम उपलब्ध कराया है. प्रदेश में एक करोड़ 49 लाख 29 हजार 078 अकुशल मजदूरों को इससे अपने गांव अपने घर के करीब रोजगार उपलब्ध हुआ है. मप्र में 12 लाख 18 हजार 864 काम शुरू किए गए हैं इनके जरिए इन मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराया गया है.

राजस्थान (Rajasthan)दूसरे स्थान पर

केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने एक जनवरी 2021 को देश के विभिन्न राज्यों की जो रैंकिंग जारी की है उसमें मप्र पूरे देश में अव्वल है. यहां की 97 फीसदी ग्राम पंचायतों में रोजगार उपलब्ध कराया गया है. दूसरे स्थान पर राजस्थान (Rajasthan)है यहां के 84 फीसदी पंचायतों में ग्रामीणों को रोजगार मिला है. तीसरे स्थान पर आंध्रप्रदेश (Andhra Pradesh) और उसके बाद पश्चिम बंगाल (West Bengal) और उत्तरप्रदेश (Uttar Pradesh) जैसे राज्यों का स्थान रहा है. तेलंगाना, नागालैंड और गोवा इस मामले में पूरे देश में सबसे पीछे रहे है.

ज्यादा रोजगार के लिए जोड़े नए काम

मनरेगा में प्रदेश के मजदूरों को ज्यादा से ज्यादा रोजगार दिया जा सके इसके लिए इस बार पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने कई सारे नए काम मनरेगा में जोड़े हैं. गांव को शहर से जोडऩे वाली ग्रेवल सड़के, आंगनबाड़ी, सामुदायिक भवन, पौधरोपण, जलाशय, खेत तालाब, मेढ़ पर पौधरोपण सहित कई तरह के काम शुरू किए गए.

पांच राज्यों में कोई काम नहीं

देश के पांच राज्य और केन्द्र शासित प्रदेश ऐसे भी है जहां मनरेगा में कोरोना काल में भी कोई काम नहीं किया गया. तेलंगाना में 12 हजार 770 पंचायतें है, लेकिन वहां कोई काम मजदूरों को नहीं दिया गया. नागालैंड की एक हजार 253 पंचायतों में कोई भी काम नहीं किया गया. गोवा की 190 पंचायतों, दमनदीप की 10 और दादरा और नगर हवेली की बीस पंचायतों में कोई भी काम मजदूरों को नहीं मिल पाया है. वहीं मिजोरम, लक्ष्यदीप की एक-एक पंचायत में ही काम उपलब्ध कराया गया.

Please share this news