पटना, 2 अप्रैल . बिहार की राजधानी पटना में बुधवार को पोस्टर के जरिए राजद के शासनकाल में धार्मिक उन्माद से तनाव फैलाने का आरोप लगाते हुए निशाना साधा गया.
पटना की सड़कों के किनारे लगे इस पोस्टर में एक तरफ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की तस्वीर है, जबकि दूसरी तरफ लालू यादव की तस्वीर है.
पोस्टर में मोटे अक्षरों में लिखा गया है, “एकता की रोशनी, नफरत की हार, शांति और सद्भाव का बिहार.”, “अमन-चैन की चले बयार, जब नीतीश की है सरकार.”
यह पोस्टर किसने लगाए हैं, इसका जिक्र पोस्टर में नहीं किया गया है. वैसे यह कोई पहला मौका नहीं है, जब राजनीतिक दलों ने पोस्टर के जरिए विरोधियों पर निशाना साधा है. इसके पहले भी राजनीतिक दल पोस्टर के जरिए सियासी हमला बोलते रहे हैं.
इस पोस्टर में राजद के शासनकाल की कई घटनाओं का जिक्र किया गया है. इसमें लिखा गया है कि सासाराम में धार्मिक उन्माद फैलाया गया, परिणामस्वरूप दंगा भड़का. अक्टूबर 1992 में सीतामढ़ी दंगा में धार्मिक उन्माद फैलाया गया, परिणामस्वरूप दंगा भड़का, जिसमें कुल 44 लोगों की मौतें हुई.
इसके अलावा पोस्टर में 10 जुलाई 1995 को पलामू और डाल्टनगंज दंगा, धार्मिक उन्माद फैलाया गया, परिणामस्वरूप दंगा भड़का, जिसमें 4 लोगों की मौतें हुईं. इसके बाद 1996 के भागलपुर, अररिया, समस्तीपुर एवं दरभंगा में धार्मिक उन्माद फैलाया गया, जिसके कारण दंगा भड़का था. इसके अलावा भी कई घटनाओं का जिक्र किया गया है.
जदयू के प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि किसने पोस्टर लगाया, ये मायने नहीं रखता. मायने ये रखता है कि बिहार की जनता सच जानना चाहती है. दंगा, दहशत और डर का राज, यही था लालू यादव का अंदाज. 12 धार्मिक दंगे और सैकड़ों बेगुनाह मारे गए. इन 12 दंगों में गुनहगारों पर क्या कार्रवाई हुई, तेजस्वी यादव जवाब दीजिए. उनका गुनहगार कौन है.
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एमएनपी/एकेएस