Wednesday , 16 June 2021

मिलर्स नहीं कर रहे धान की मिलिंग, कामकाज ठप

भोपाल (Bhopal) . प्रदेश के मिलर्स धान की मिलिंग करने में आनाकानी कर रहे हैं. उनका कहना है कि मौजूदा शर्तों के साथ मिलिंग करने में मिलर्स को घाटा हो रहा है, इसलिए वे मिलिंग नहीं कर रहे हैं. यही वजह है कि अभी सिर्फ डेढ़ लाख टन धान की मिलिंग ही हो पाई है. वहीं, गोदाम भरे हुए हैं, जिससे गेहूं के सुरक्षित भंडारण में परेशानी की आशंका जताई जा रही है.

बता दें कि मध्य प्रदेश पहली बार केंद्र सरकार (Central Government)को सेंट्रल पूल में 14 लाख टन चावल देगा. इसके लिए समर्थन मूल्य पर खरीदी गई 39 लाख टन धान की मिलिंग होनी है लेकिन यह काम ठप पड़ा है. उधर, सरकार ने समाधान निकालने के लिए मंत्री परिषद की समिति बनाई है जो प्रति क्विंटल प्रोत्साहन राशि दोगुना (guna) करने पर विचार कर रही है. प्रदेश में समर्थन मूल्य पर इस बार रिकॉर्ड 39 लाख टन धान समर्थन मूल्य पर खरीदी गई थी. राज्य नागरिक आपूर्ति निगम ने तेजी से मिलिंग कराने के लिए मिलर्स को ज्यादा दूर परिवहन करके धान न लाने पड़े, इसके लिए क्लस्टर बनाए थे. इसके बावजूद मिलर्स ने रुचि नहीं दिखाई.

दरअसल, निगम गुणवत्‍ता को लेकर काफी सख्ती बरत रहा है और मिलर्स का कहना है कि बारिश में धान के भीगने की वजह से टूटन अधिक हो रही है. ऐसे में एक क्विंटल धान पर 67 किलोग्राम चावल देना संभव नहीं है.प्रोत्साहन राशि भी 25 रुपये प्रति क्विंटल कम है. मध्य प्रदेश राइस मिलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष आशीष अग्रवाल का कहना है कि शासन की मौजूदा नीति के तहत मिलिंग करना संभव नहीं है. हमने टेस्ट मिलिंग करके धान देने का प्रस्ताव रखा था पर शासन को केंद्र सरकार (Central Government)ने अनुमति नहीं दी. एक क्विंटल धान में बमुश्किल 45 प्रतिशत चावल बन रहा है. टूटन अधिक है और बाजार में इसकी कीमत 13-14 रुपये प्रति किलोग्राम से अधिक नहीं है.ऐसे में अच्छी धान लेकर भारतीय खाद्य निगम के मापदंड के अनुसान चावल देने के लिए मिलिंग करके चावल मिलाना होगा, जो घाटे का सौदा है.

यही वजह है कि नौ फरवरी को मिलर्स ने मुख्यमंत्री (Chief Minister) शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात की थी. इसमें प्रोत्साहन राशि सौ रुपये करने और भारतीय खाद्य निगम को 60 की जगह 20 प्रतिशत चावल देने का प्रस्ताव रखा था. सरकार ने प्रोत्साहन राशि 25 से बढ़ाकर 50 रुपये प्रति क्विंटल पर दी. इसके बावजूद अब तक मिलर्स तैयार नहीं हुए हैं. इस बारे में नागरिक आपूर्ति निगम के प्रबंध संचालक अभिजीत अग्रवाल ने बताया कि धान की मिलिंग से 24 लाख टन चावल बनेगा. इसमें से साढ़े नौ लाख टन राज्य को सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लिए सालभर में लगेगा. शेष चावल भारतीय खाद्य निगम को सेंट्रल पूल में देना है लेकिन मिलिंग में समस्या आ रही है. इसके लिए पिछले दिनों मंत्री परिषद की समिति ने विभिन्न् विकल्पों पर विचार किया है. इसमें प्रोत्साहन राशि सौ रुपये प्रति क्विंटल करने और सेंट्रल पूल में चावल देने का प्रतिशत कम करने का प्रस्ताव भी शामिल है.

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