Sunday , 18 April 2021

बंगाल चुनाव से पहले ममता बनर्जी को एक और झटका

कोलकाता (Kolkata) . पश्चिम बंगाल (West Bengal) में विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) कुछ महीनों के बाद होने वाले हैं. चुनाव से ठीक पहले राज्य की मुख्यमंत्री (Chief Minister) और तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी को एक के बाद एक झटके लग रहे हैं. ताजा झटका बंगाल सरकार में मंत्री रहे लक्ष्मी रतन शुक्ला ने दिया है. उन्होंने बंगाल के खेल राज्य मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है. वे पूर्व क्रिकेटर भी रहे हैं. लक्ष्मी रतन शुक्ला ने तृणमूल कांग्रेस के हावड़ा जिले के अध्यक्ष का पद भी छोड़ दिया है.

हालांकि, वे टीएमसी के विधायक बने रहेंगे. मीडिया (Media) रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि उन्होंने राजनीति छोड़ने का मन बना लिया है. पिछले महीने मिदनापुर में अमित शाह की रैली में टीएमएस, कांग्रेस और सीपीआईएम के 72 नेता बीजेपी में शामिल हुए थे. इस रैली में तृणमूल कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे शुभेंदु अधिकारी भी अमित शाह के साथ मंच में दिखे और भाजपा का दामन थाम लिया था. इसके बाद उनके भाई सौमेन्दु अधिकारी भी बीजेपी में शामिल हो गए.

अमित शाह ने मिदनापुर की रैली में बताया था कि एक साथ एक एमपी, नौ एमएलए, एक एक्स मिनिस्टर, एक एमओएस, 15 काउंसलर, 45 चेयरमैन और जिला पंचायत के दो अध्यक्ष पार्टी में शामिल हुए हैं. विधायकों में शुभेंदु अधिकारी, तापसी मंडल, अशोक डिंडा, सुदीप मुखर्जी, सैकत पंजा, शीलभद्र दत्ता, दीपाली बिस्वास, शुक्र मुंडा, श्यामपदा मुखर्जी, विश्वजीत कुंडू और बंसारी मैती शामिल थे. इसके अलावा, पूर्व बर्द्धमान से टीएमसी सांसद (Member of parliament) सुनील मंडल और पूर्व सांसद (Member of parliament) दशरथ टिर्के भी बीजेपी में शामिल हुए थे.  पश्चिम बंगाल (West Bengal) की चुनावी जंग में बीजेपी जनवरी में अपने अभियान को और तेज करने जा रही है. माना जा रहा है कि कई और नेता पार्टी का दामन थाम सकते हैं. बीजेपी अध्यक्ष जे पी नड्डा 9 और 10 जनवरी को राज्य के दौरे पर रहेंगे, जबकि गृह मंत्री अमित शाह 30 और 31 जनवरी को पश्चिम बंगाल (West Bengal) जाएंगे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) 23 जनवरी को नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती के कार्यक्रम में वर्चुअल रूप से शामिल होंगे. बीजेपी और तृणमूल कांग्रेस के बीच चल रहे घमासान में जनवरी माह में बीजेपी तृणमूल में और सेंध लगाने की कोशिश करेगी. साथ ही अपने अभियान को नीचे तक पहुंचाने के लिए बड़े नेताओं के जरिए माहौल भी बना रही है. 

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