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Monday, 9 November 2026
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बेंगलुरु में पांचवें दिन भी तेंदुआ पकड़ में नहीं आया, निवासियों ने वन विभाग से सख्त कार्रवाई की मांग की

Bengaluru में पांचवें दिन भी तेंदुआ पकड़ में नहीं आया, निवासियों ने वन विभाग से सख्त कार्रवाई की मांग की

Bengaluru, 13 जुलाई . Bengaluru के बाहरी इलाके में एक रिहायशी इलाके में बार-बार देखा जा रहा एक तेंदुआ Monday को लगातार पांचवें दिन भी पकड़ में नहीं आया. इससे निवासियों में डर फैल गया है और वन विभाग की कार्रवाई की आलोचना हो रही है.

शहर के बाहरी इलाके ब्यादाराहल्ली के भरत नगर रिहायशी इलाके में तेंदुआ देखा गया है. वन विभाग के अधिकारियों ने जानवर को पकड़ने के लिए मुर्गियों का चारा डालकर एक पिंजरा लगाया था. हालांकि, तेंदुए के बजाय आवारा कुत्ते पिंजरे में फंस गए, जिससे इस ऑपरेशन में आने वाली चुनौतियों का पता चलता है.

स्थानीय लोगों का आरोप है कि बार-बार तेंदुआ दिखने के बावजूद वन विभाग के अधिकारी उसे पकड़ने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा पाए हैं.

एक निवासी ने पूछा, “तेंदुआ कुछ दिनों के अंतराल पर दिखाई दे रहा है और कई बार रिहायशी इलाकों में घुस आया है. वन विभाग ने बस एक पिंजरा लगा दिया है और मामले से पल्ला झाड़ लिया है. मौके पर शायद ही कोई अधिकारी मौजूद रहता है. अगर तेंदुआ किसी पर हमला करता है तो कौन जिम्मेदार होगा?”

स्थानीय लोगों का कहना है कि इलाके में डर का माहौल है और कई लोग पार्क और सार्वजनिक जगहों पर जाने से बच रहे हैं. जिन इलाकों में शाम के समय लोगों की भारी भीड़ हुआ करती थी, वे अब काफी हद तक सुनसान रहते हैं.

इलाके में तेंदुआ देखे जाने के बाद पास के ईस्ट वेस्ट कॉलेज ने छुट्टियां घोषित कर दी हैं.

एक अन्य निवासी ने कहा कि जंगली जानवर के बार-बार दिखने से बच्चे और महिलाएं खास तौर पर डरे हुए हैं.

निवासी ने कहा, “बच्चे डरे हुए हैं और महिलाएं, खासकर शाम के समय, घर से बाहर निकलने से कतरा रही हैं.अधिकारियों को उन निवासियों के साथ तालमेल बिठाना चाहिए जिनके पास cctv कैमरे हैं और तेंदुए की गतिविधियों पर नजर रखने और ऑपरेशन की बेहतर योजना बनाने के लिए फुटेज का इस्तेमाल करना चाहिए.”

स्थानीय लोगों के मुताबिक, तेंदुआ पास के पार्क से रिहायशी इलाकों में घुस रहा है और उसे पिछले Thursday , Friday और फिर Sunday को देखा गया था.

माना जाता है कि घनी वनस्पतियों और झाड़ियों वाले इस पार्क ने जानवर की आवाजाही के लिए छिपने की जगह दी है. शुरुआत में तेंदुआ दिखने के बाद, स्थानीय विधायक एस.टी. सोमशेखर ने दखल दिया और पार्क के अंदर घनी वनस्पतियों और झाड़ियों को साफ करने का इंतजाम किया. हालांकि, निवासियों का कहना है कि सफाई अभियान के बाद भी तेंदुआ फिर से दिखाई दिया.

पिंजरे में तेंदुए के बजाय आवारा कुत्तों के फंसने के बाद, वन विभाग के अधिकारियों ने पिंजरे को दूसरी जगह शिफ्ट कर दिया. निवासी अब मांग कर रहे हैं कि और पिंजरे लगाए जाएं और 24 घंटे गश्त बढ़ाई जाए.

लगातार तेंदुआ दिखने से रोजमर्रा की जिंदगी पर भी असर पड़ा है; कम लोग घर से बाहर निकल रहे हैं और अंधेरा होने के बाद इलाके के कुछ हिस्सों में गाड़ियों की आवाजाही में भी काफी कमी आई है. इस बीच, चामराजनगर जिले में किसानों ने डिप्टी कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट (डीसीएफ) के ऑफिस के बाहर विरोध प्रदर्शन किया. उनकी मांग थी कि उन तेंदुओं और बाघों को पकड़ने के लिए तुरंत कार्रवाई की जाए जो अपने रहने की जगह (हैबिटैट) खत्म होने के कारण इलाके में इंसानी बस्तियों में भटक रहे हैं.

प्रदर्शनकारियों ने मार्च निकाला और वन विभाग के अधिकारियों पर जंगली जानवरों के हमलों से ग्रामीणों की सुरक्षा करने में नाकाम रहने का आरोप लगाया. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर अधिकारियों ने जानवरों को नहीं पकड़ा, तो वे अपना आंदोलन और तेज कर देंगे.

किसानों का आरोप है कि माले महादेश्वरा हिल्स और बिलिगिरिरंगना हिल्स के जंगलों में रहने वाले बूढ़े तेंदुए और बाघ, अपने रहने की जगह खत्म होने के कारण खाने की तलाश में तेजी से गांवों में घुस रहे हैं.

उन्होंने दावा किया कि वन विभाग जंगल के इलाकों में जानवरों के लिए पर्याप्त शिकार और उनके रहने की जगह का सही प्रबंधन करने में नाकाम रहा है, जिससे जंगली जानवर खेती वाले खेतों और रिहायशी इलाकों में आने को मजबूर हो रहे हैं.

प्रदर्शनकारियों ने उस पूर्व वन मंत्री के वादों को भी याद दिलाया, जिसमें उन्होंने इंसानों और जंगली जानवरों के बीच बढ़ते टकराव को सुलझाने के लिए वैज्ञानिक तरीके अपनाने और एक खास निगरानी सिस्टम बनाने की बात कही थी.

उन्होंने Government से अपील की कि ऐसी घटनाओं को रोकने और लोगों व जंगली जानवरों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उन उपायों को तुरंत लागू किया जाए.

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एससीएच/डीकेपी

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