Wednesday , 8 April 2020
मुख्यमंत्री अधिवक्ता कल्याण योजना को वकीलों ने हाईकोर्ट में दी चुनौती

मुख्यमंत्री अधिवक्ता कल्याण योजना को वकीलों ने हाईकोर्ट में दी चुनौती


नई दिल्ली (New Delhi) . दिल्ली सरकार (Government) की मुख्यमंत्री (Chief Minister) अधिवक्ता कल्याण योजना को चुनौती देते हुए वकीलों के एक समूह ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है. याचिका में कहा कि इस योजना का लाभ बार काउंसिल ऑफ दिल्ली (बीसीडी) में पंजीकृत सभी वकीलों को देने पर सहमति बनी थी लेकिन सरकार (Government) ने वकीलों की समिति की सिफारिश के बावजूद इसके केवल दिल्ली की मतदाता सूची में दर्ज मतदाता वकीलों तक सीमित किया गया है. याचिका में कहा कि इस योजना का लाभ उन सभी वकीलों को भी मिलना चाहिए जो बीसीडी में पंजीकृत हैं.

याचिका दायर करने वाले अधिवक्ताओं की अगुवाई कर रहे वकील नगिन्दर बेनीपाल का कहना है कि उन्होंने हाईकोर्ट रजिस्ट्रार (लिस्टिंग और फाइलिंग) के समक्ष इस याचिका का फोन पर उल्लेख किया है. अदालत के अधिकारी की ओर से उन्हें सूचित किया है कि कोरोना (Corona virus) का प्रभाव समाप्त होने के बाद याचिका को सूचीबद्ध किया जाएगा. कोरोना (Corona virus) महामारी के खतरे को देखते हुए इस समय हाईकोर्ट का कामकाज 4 अप्रैल तक के लिये बंद है और केवल बेहद जरूरी मामलों की सुनवाई के लिये रजिस्ट्रार के यहां फोन पर ही इसका उल्लेख किया जा सकता है.

पेश याचिका में कहा है कि दिल्ली सरकार (Government) ने दिल्ली बार काउंसिल में पंजीकृत और राष्ट्रीय राजधानी में वकालत कर रहे सभी वकीलों के लिये नवंबर 2019 में एक कल्याण योजना की घोषणा की थी. सरकार (Government) ने इस योजना के लिये निर्धारित 50 करोड़ रु की धनराशि के उपयोग पर सिफारिशें देने के लिये वकीलों की 13 सदस्यीय समिति बनाई थी. सरकार (Government) ने पिछले साल 18 दिसंबर में समिति की सारी सिफारिशें स्वीकार कर ली थीं. इनके मुताबिक योजना का लाभ बीसीडी में पंजीकृत सभी वकीलों को मिलना था. इसके बावजूद मंत्री परिषद ने इसे सिर्फ दिल्ली की मतदाता सूची में शामिल वकीलों तक सीमित कर दिया.