Friday , 31 March 2023

लॉरेंस ने हथियारों के लिए बनाई थी 007 गैंग: सरपंच जो जान बचाकर पंजाब से लाया उसे बनाया पहला पार्टनर

2017 में जोधपुर कोर्ट में पेशी के दौरान लॉरेंस को लाया गया था. (फाइल फोटो)

जोधपुर .लॉरेंस के पाकिस्तान कनेक्शन सामने आते ही NIA एक्टिव हो गई. NIA की टीम जोधपुर में भी छापेमारी की. टीम ने जोधपुर के बालेसर के भाटेलाई गांव व डाली बाई मंदिर स्थित वितराग सिटी में छापे मारे यह दोनों ठिकाने कैलाश मांजू के थे. आखिर एनआईए कैलाश मांजू के ठिकानों पर क्यों पहुंची इसके पीछे कैलाश मांजू का लॉरेंस कनेक्शन हैं.

लॉरेंस ने राजस्थान में रंगदारी व टैरर का नेटवर्क जोधपुर से शुरु किया था. इसका सबसे पुराना साथी कैलाश मांजू था. कैलाश लॉरेंस के लिए रंगदारी करता था. अपने गांव का सरपंच होकर उसने रंगदारी का नेटवर्क सेट किया और लॉरेंस गैंग में शामिल हो गया. राजस्थान में लॉरेंस के बढ़ते टेरर में सबसे बड़ा सहयोगी कैलाश मांजू रहा. कैलाश व लॉरेंस जोधपुर के सेंट्रल जेल में मिले तभी से लॉरेंस के साथ रंगदारी में लग गया. NIA टैरर फंडिग व हथियारों की खरीद फरोख्त को लेकर कैलाश मांजू के ठिकानों पर छापा मारी कर रही है.

लॉरेंस ने 2016-17 में जोधपुर से टेरर का जाल बुनना शुरु किया था. राजस्थान में रंगदारी के लिए फायरिंग व हत्या की शुरुआत उसने जोधपुर में की. इसके साथ कैलाश मांजू भी जुड़ गया. कैलाश मांजू बालेसर से 45 किलोमीटर दूर भाटेलाई का निवासी है. वहां वह पिता की साख पर सरपंच बना. कैलाश के पिता रामचंद्र भी सरपंच थे. वहां उसने अपनी सरपंची का गलत फायदा उठाना शुरु किया. पैसों के लालच व वर्चस्व की होड़ में वह लॉरेंस से जुड़ गया. उसने लॉरेंस को जोधपुर के नामी बिजनसमैन व रसूखदारों की लिस्ट लॉरेंस को भेजता.

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