Monday , 19 April 2021

कर्नाटक डेप्युटी स्पीकर धर्मेगौड़ा ने विधानपरिषद के अंदर हुई अभद्रता से दुखी होकर की खुदकुशी, मौत से पहले धर्मेगौड़ा ने लिखा था सुइसाइड नोट


मौत से पहले धर्मेगौड़ा ने लिखा था सुइसाइड नोट

बेंगलुरु (Bangalore) . कर्नाटक (Karnataka) विधानसभा के उपाध्यक्ष और जेडीएस नेता एसएल धर्मेगौड़ा ने विधान परिषद में अपने साथ हुई अभद्रता से दुखी होकर आत्महत्या (Murder) कर ली है. उनके करीबी और प्रशंसक इस घटना से स्तब्ध है. धर्मेगौड़ा का शव चिकमगलुरु में कडूर तालुक स्थित एक रेलवे (Railway)ट्रैक पर मिला. बताया जा रहा है कि उन्होंने ट्रेन के आगे कूदकर अपनी जान दे दी. पुलिस (Police) ने धर्मेगौड़ा के पास से एक सुइसाइड नोट भी बरामद किया है जिसमें उन्होंने हाल ही में कर्नाटक (Karnataka) विधान परिषद के अंदर हुई घटना का जिक्र किया है. रिपोर्ट के मुताबिक, गौड़ा सोमवार (Monday) रात 10 बजे अपने घर से सैंट्रो कार से निकले थे. जब काफी देर बाद भी वह घर नहीं लौटे तो पुलिस (Police) और स्टाफ उन्हें ढूंढने निकल पड़ा. मंगलवार (Tuesday) तड़के उनका शव बरामद हुआ.

पुलिस (Police) सूत्रों ने बताया कि धर्मेगौड़ा ने मौत से पहले सुइसाइड नोट लिखा था. इसमें विधान परिषद के अंदर उनके साथ हुई अभद्रता और डिप्रेशन का जिक्र किया है. बताया जाता है कि इस घटना से धर्मेगौड़ा को गहरा सदमा पहुंचा था. उन्होंने अपने करीबियों से इस बारे में बताया था. हालांकि पुलिस (Police) ने अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है. बता दें कि 15 दिसंबर को ही कर्नाटक (Karnataka) विधान परिषद के अंदर काफी हंगामा हुआ था. अविश्वास प्रस्ताव के मुद्दे पर उप सभापति एसएल धर्मेगौड़ा को सभापति के आसन से खींचकर उतार दिया था और सदस्यों ने धक्कामुक्की करते हुए एक-दूसरे को अपशब्द भी कहे थे. कई वरिष्ठ नेताओं ने सदन की सौ साल के इतिहास में यह अप्रत्याशित घटना काले धब्बे के समान बताया था.

दरअसल कर्नाटक (Karnataka) में भाजपा सरकार ने सभापति के. प्रताप चंद्र शेट्टी पर अप्रत्याशित रूप से सत्र को स्थगित करने का आरोप लगाते हुए 15 दिसंबर को एक दिन के लिए विधान परिषद का सत्र बुलाया था. भाजपा की तरफ से शेट्टी के विरुद्ध लाया गया अविश्वास प्रस्ताव उस दिन के एजेंडे में शामिल नहीं था. इससे पहले सभापति ने इस प्रस्ताव को प्रक्रिया में त्रुटि के आधार पर खारिज कर दिया था और तभी से भाजपा के सदस्य इस पर विचार करने की मांग कर रहे थे. भाजपा के सदस्यों ने जेडी (एस) के समर्थन से अविश्वास प्रस्ताव लाकर शेट्टी को सभापति के पद से हटाने की योजना बनाई थी. विधान परिषद की कार्यवाही शुरू होते ही शेट्टी के आने से पहले ही गौड़ा सभापति के आसन पर बैठ गए और कोरम की घंटी बज रही थी जिससे कांग्रेस के सदस्य नाराज हो गए और उन्होंने आसन के पास जाकर गौड़ा से आसन से हटने को कहा क्योंकि वह अविश्वास प्रस्ताव की अनुमति दे देते.

इसके बाद भाजपा और जेडी (एस) के सदस्य गौड़ा की सुरक्षा में आकर खड़े हो गए. इससे दोनों पक्षों के सदस्यों के बीच कहासुनी शुरू हो गई और हंगामा होने लगा. नसीर अहमद समेत कांग्रेस के कुछ सदस्यों ने आरोप लगाया कि सरकार ने सभापति के आने से पहले ही गौड़ा की मदद से कार्यवाही शुरू कर दी है ताकि शेट्टी के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया जा सके जिसे पहले खारिज कर दिया गया था. भाजपा और जेडी (एस) के सदस्यों ने कहा कि चूंकि अविश्वास प्रस्ताव सभापति के विरुद्ध है इसलिए उप सभापति को कार्यवाही संचालित करने का अधिकार है. इसके बाद एम नारायणस्वामी और नसीर अहमद समेत कुछ कांग्रेस सदस्यों ने उप सभापति को आसन से जबरदस्ती खींचकर हटा दिया. इस दौरान विधान परिषद के कई सदस्य और मार्शल भी धक्कामुक्की के शिकार हुए और कांग्रेस के एक सदस्य सभापति के आसन पर बैठने में कामयाब हो गए थे.

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