भारत का शहरी गैस वितरण 2030 तक 25 प्रतिशत तक पहुंचने की उम्मीद

मुंबई, 24 मार्च . भारत सरकार का लक्ष्य देश को गैस आधारित अर्थव्यवस्था में बदलना है, इसी के साथ शहरी गैस वितरण (सीजीडी) का योगदान वित्त वर्ष 2024 में 20 से बढ़कर 2030 तक 25 प्रतिशत होने का अनुमान है. सोमवार को जारी एक लेटेस्ट रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई.

वित्त वर्ष 2025-30 के दौरान इस क्षेत्र के लिए गैस की खपत की मात्रा 10 प्रतिशत की संचयी औसत वृद्धि दर (सीएजीआर) से बढ़ने की संभावना है, जिसे वित्त वर्ष 2025-27 के दौरान 30,000 करोड़ रुपये के पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) से समर्थन मिलेगा.

केयरएज रेटिंग्स की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2024 में भारत की कुल प्राकृतिक गैस खपत में उर्वरक उद्योग के बाद सीजीडी क्षेत्र दूसरे सबसे बड़े उपभोक्ता के रूप में स्थान पर रहा.

ऐतिहासिक रूप से, रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद प्राकृतिक गैस की कीमतों में तेज वृद्धि के बीच वित्त वर्ष 2023 में अस्थायी गिरावट के साथ सीजीडी की खपत में लगातार वृद्धि देखी गई है. हालांकि, वित्त वर्ष 2024 में मांग में सुधार हुआ.

केयरएज रेटिंग्स के सहायक निदेशक तेज किरण घट्टामनेनी ने कहा, “सीजीडी खपत मिक्स में, सीएनजी की मात्रा में वृद्धि जारी रहने की उम्मीद है, जिसे सीएनजी-पावर्ड वाहनों और ईंधन भरने वाले स्टेशनों में वृद्धि से सपोर्ट मिलेगा.”

पीएनजी-डी पेनेट्रेशन में अपार संभावनाएं हैं, देश के दक्षिण, पूर्व और उत्तर-पूर्व भागों में एलपीजी की तुलना में इसकी हिस्सेदारी केवल 1.5 -2 प्रतिशत है.

सरकार का लक्ष्य देश को गैस आधारित अर्थव्यवस्था में बदलना और 2030 तक प्राथमिक ऊर्जा मिश्रण में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी को 15 प्रतिशत बढ़ाना है, जो कि 2024 तक 6.5 प्रतिशत है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि इस संदर्भ में, ‘शहरी गैस वितरण उद्योग’ उपभोक्ताओं के लिए अंतिम-मील कनेक्टिविटी सुनिश्चित कर भारत के ऊर्जा मिश्रण में प्राकृतिक गैस के योगदान को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.

स्वच्छ ईंधन तक पहुंच बढ़ाने की दिशा में सरकार के प्रयास के साथ अनुकूल नीतिगत निर्णय इस क्षेत्र के लिए कुछ प्रमुख नियामक सक्षमकर्ता हैं.

एसकेटी/