नई दिल्ली, 2 अप्रैल . भारतीय आईटी सर्विसेज सेक्टर की डॉलर ग्रोथ मध्यम से लंबी अवधि में एकल अंक में रह सकती है. यह जानकारी एचएसबीसी रिसर्च द्वारा बुधवार को दी गई.
रिपोर्ट में बताया गया कि वित्त वर्ष 26 में हम बड़ी कंपनियों में 4-5 प्रतिशत की वृद्धि दर की उम्मीद कर रहे हैं. इसकी वजह बीते दो वर्षों में कम आधार का होना है और अमेरिका एवं यूरोपीय बाजारों का स्थिर होना है.
रिपोर्ट में उम्मीद जताई गई कि जीसीसी के चलते आने वाले समय में चुनौतियां बनी रह सकती हैं और जेनएआई का भी मामूली असर देखने को मिल सकता है. डॉलर ग्रोथ में 4-5 प्रतिशत और भारतीय रुपये के मूल्यह्रास में 3-4 प्रतिशत की गिरावट के कारण वित्त वर्ष 25-27 में ईपीएस में 7-9 प्रतिशत की बढ़त देखने को मिल सकती है.
आईटी सेक्टर बड़े स्तर पर अमेरिकी अर्थव्यवस्था से जुड़ा हुआ है.
रिपोर्ट में आगे कहा गया कि उतार-चढ़ाव को देखते हुए विश्लेषकों का मानना है कि 2025 के आउटलुक के लिए कंपनियां सतर्क रह सकती हैं.
सबसे खराब स्थिति को मानते हुए, “हमारा मानना है कि इन्फोसिस और एचसीएलटेक दोनों वित्त वर्ष 26 के लिए 2-5 प्रतिशत की वृद्धि की गाइडेंस दे सकती हैं.”
वित्त वर्ष 26 की पहली तिमाही में विप्रो का गाइडेंस 0-2 प्रतिशत हो सकता है. साथ ही, रिपोर्ट में बताया गया कि वित्त वर्ष 25 की चौथी तिमाही एक कमजोर तिमाही होने की संभावना है. इसकी वजह वैश्विक अस्थिरता और यूरोप में कमजोर प्रदर्शन बरकरार रहना है.
एक अन्य रिपोर्ट में क्रिसिल की ओर से बताया गया कि भारतीय आईटी सर्विसेज सेक्टर में वित्त वर्ष 2026 में 6 से 8 प्रतिशत की वृद्धि देखने को मिल सकती है.
क्रिसिल ने रिपोर्ट में आगे कहा कि यह भारतीय आईटी सर्विसेज सेक्टर के लिए लगातार तीसरा वित्तीय वर्ष होगा, जिसमें वृद्धि दर एकल अंक में होगी. हालांकि, ऑपरेटिंग मुनाफा अच्छी स्थिति में है. इसकी वजह कर्मचारियों की संख्या में कम बढ़ोतरी और कर्मचारियों के नौकरी छोड़ने की दर में कमी है.
रिपोर्ट में बताया गया कि आईटी सर्विसेज सेक्टर की आय में बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज और इश्योरेंस की हिस्सेदारी दो-तिहाई है. रिटेल की हिस्सेदारी 15 प्रतिशत, मैन्युफैक्चरिंग की 10 प्रतिशत और हेल्थकेयर की 10 प्रतिशत है.
–
एबीएस/