लाओस में भारतीय दूतावास ने नौकरी के नाम पर धोखाधड़ी का शिकार हुए 13 भारतीयों को बचाया

वियनतियाने, 26 मई . लाओस में भारतीय दूतावास ने रविवार को कहा कि उसने नौकरी के नाम पर धोखाधड़ी का शिकार हुए दक्षिणपूर्व एशियाई देश के बोकेओ प्रांत में 13 भारतीयों को सफलतापूर्वक बचाया है और उन्हें स्वदेश वापस लाया है, जिनमें अटापेउ प्रांत की एक लकड़ी की फैक्ट्री से सात उड़िया श्रमिक और गोल्डन ट्रायंगल स्‍पेशल इकोनोमिक जोन से छह भारतीय युवा शामिल हैं.

दूतावास ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “दूतावास ने अब तक लाओ पीपुल्स डेमोक्रेटिक रिपब्लिक (पीडीआर) से 428 भारतीयों को बचाया है. हम लाओ अधिकारियों को उनके सहयोग के लिए धन्यवाद देते हैं.”

यह कहते हुए कि भारतीयों की सुरक्षा और भलाई सुनिश्चित करना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है, दूतावास ने लाओस/लाओ पीडीआर में आने वाले भारतीय श्रमिकों को फर्जी या अवैध नौकरी की पेशकश से धोखा न खाने की सलाह दी.

इस महीने की शुरुआत में दूतावास ने एक एडवाइजरी जारी की थी, जिसमें हाल के उदाहरणों का ब्‍योरा दिया गया था, जिसमें भारतीय नागरिकों को थाईलैंड के रास्ते लाओस में रोजगार का लालच दिया गया था.

सलाहकार ने कहा, “ये फर्जी नौकरियां लाओस में गोल्डन ट्रायंगल स्पेशल इकोनॉमिक जोन में कॉल-सेंटर घोटालों और क्रिप्टो-मुद्रा धोखाधड़ी में शामिल संदिग्ध कंपनियों द्वारा ‘डिजिटल सेल्स एंड मार्केटिंग एक्जीक्यूटिव्स’ या ‘कस्टमर सपोर्ट सर्विस’ जैसे पदों के लिए हैं. ऐसी जगहों पर एजेंट दुबई, बैंकॉक, सिंगापुर और भारत की इन कंपनियों से जुड़ी कंपनियां एक साधारण साक्षात्कार और टाइपिंग टेस्ट लेकर भारतीय नागरिकों की भर्ती कर रही हैं और उच्च वेतन, होटल बुकिंग के साथ-साथ वापसी हवाई टिकट और वीजा सुविधा की पेशकश कर रही हैं.”

इसमें कहा गया है कि पीड़ितों को अवैध रूप से थाईलैंड से लाओस में सीमा पार ले जाया जाता है और कठोर और प्रतिबंधात्मक परिस्थितियों में लाओस में गोल्डन ट्रायंगल स्‍पेशल इकोनोमिक जोन में काम करने के लिए बंदी बना लिया जाता है.

सलाहकार ने कहा, “कभी-कभी, उन्हें अवैध गतिविधियों में लिप्त आपराधिक सिंडिकेट द्वारा बंधक बना लिया जाता है और लगातार शारीरिक और मानसिक यातना के तहत कठिन परिस्थितियों में काम करने के लिए मजबूर किया जाता है. कुछ अन्य मामलों में, भारतीय श्रमिकों को लाओस के अन्य क्षेत्रों में काम करने के लिए लाओस लाया गया है. उन्‍हें खनन, लकड़ी के कारखाने में लगाया जाता है. ज्यादातर मामलों में उनके संचालक उनका शोषण करते हैं और उन्हें खतरे में डालते हैं.”

भारतीय नागरिकों को धोखाधड़ी या शोषणकारी नौकरी की पेशकशों में न फंसने की सलाह देते हुए दूतावास ने उनसे अत्यधिक सावधानी बरतने और लाओस में किसी भी नौकरी की पेशकश को लेने से पहले भर्ती एजेंटों के साथ-साथ किसी भी कंपनी के इतिहास को सत्यापित करने का अनुरोध किया.

सलाहकार ने चेतावनी दी, “थाईलैंड या लाओस में आगमन पर वीजा रोजगार की अनुमति नहीं देता है और लाओ अधिकारी ऐसे वीजा पर लाओस आने वाले भारतीय नागरिकों को वर्क परमिट जारी नहीं करते हैं. कृपया ध्यान दें कि लाओस में मानव तस्करी के दोषियों को 18 साल तक की जेल की सजा सुनाई गई है.”

एसजीके/