भारत आतंकी हमलों को होने से पहले ही रोक देगा – Daily Kiran
Thursday , 28 October 2021

भारत आतंकी हमलों को होने से पहले ही रोक देगा

 

नई दिल्ली (New Delhi) . पीएम नरेंद्र मोदी जल्द ही नेशनल इंटेलिजेंस ग्रिड (एनएटीजीआरआइडी) को लॉन्च कर सकते हैं. मकसद भारत की आतंक विरोधी क्षमताओं को बढ़ावा देने के लिए अत्याधुनिक तकनीक प्रदान करना है. रिपोर्ट्स के मुताबिक़ इलेक्ट्रॉनिक डेटाबेस के फाइनल सिंक्रनाइज़ेशन की टेस्टिंग जारी है. गृहमंत्री अमित शाह ने हाल ही में बताया था कि कोरोना महामारी (Epidemic) के कारण एनएटीजीआरआइडी को लॉन्च करने में देरी हुई है लेकिन जल्द ही इसे लॉन्च कर दिया जाएगा. एनएटीजीआरआइडी आतंकवाद, आर्थिक अपराध आदि की घटनाओं की जानकारी को सहज और सुरक्षित डेटाबेस के रूप में रख सकता है. इसके जरिए संदिग्धों को आसानी से रियल टाइम ट्रैक किया जा सकता है और आतंकी हमलों को रोका जा सकता है. दावा है कि इससे इमिग्रेशन, बैंकिंग, हवाई और रेल यात्रा अधिक सुरक्षित हो सकेंगे. 2008 में मुंबई (Mumbai) हमलों के बाद सुरक्षा एजेंसियों के पास रियल टाइम पर महत्वपूर्ण जानकारी के लिए कोई टूल नहीं था. उसके बाद से एनएटीजीआरआइडी जैसे किसी टूल की जरूरत महसूस की जा रही थी. शुरुआत में 10 यूजर एजेंसी और 21 सर्विस प्रोवाइडर्स को एनएटीजीआरआइडी से जोड़े जाने का प्लान है. और बाद के चरणों में करीब 950 संगठनों को इससे जोड़ा जाएगा. इन डेटा सोर्सेज में इमिग्रेशन, बैंकिंगम वित्तीय लेनदेन, टेलीकम्युनिकेशंस आदि शामिल हैं. आयकर विभाग एनएटीजीआरआइडी के तहत 10 जांच और खुफिया एजेंसियों के साथ पैन और बैंक (Bank) के डिटेल्स साझा करेगा.

सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टीगेशन डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यु इंटेलिजेंस एन्फोर्समेंट डायरेक्टरेट सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ डायरेक्ट टैक्सेज कैबिनेट सेक्रेटेरिएट, इंटेलिजेंस ब्यूरो डायरेक्टरेट जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलिजेंस, नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरोफाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट और नेशनल इन्वेस्टीगेशन एजेंसी जैसे संस्थानों के पास एनएटीजीआरआइडी का एक्सेस रहेगा. एनएटीजीआरआइडी की जरूरत भारतीय सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों को 2008 में हुए मुंबई (Mumbai) आतंकी हमलों के बाद हुई. इस वक्त तक एजेंसियों के पास रियल टाइम ट्रैकिंग का कोई तरीका नहीं था. इसी कमी को दूर करने के लिए कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी ने 8 अप्रैल 2010 को 3400 करोड़ रुपये की एनएटीजीआरआइडी प्रोजेक्ट को मंजूरी दी थी, लेकिन 2012 के बाद इसका काम धीमा हो गया था. बाद में मोदी सरकार ने इसके पुनरुद्धार के लिए निर्देश जारी किया था.

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