Thursday , 9 April 2020
सदन में कांग्रेस ने छुट्टा जानवरों से होने वाली किसानों की समस्याओं का प्रकरण उठाया

सदन में कांग्रेस ने छुट्टा जानवरों से होने वाली किसानों की समस्याओं का प्रकरण उठाया

लखनऊ. आज विधान सभा में कांगे्रस विधान मण्डल दल की नेता आराधना मिश्रा ‘‘मोना’’ ने छुट््टा जानवरों से होने वाली किसानों की समस्याओं का प्रकरण नियम 56 के अंतर्गत पूरे जोर शोर से उठाया. नेता, कांगे्रस विधान मण्डल दल ने कहा कि एक तरफ सरकार किसानों की उपज का दोगुना मुल्य देने का वायदा करके सत्ता आयी थी वहीं दूसरी तरफ किसानों अपनी उपज को खेतों से खलिहान तक भी नहीं पा रहे हैं- क्योंकि छुट््टा जानवर उनकी फसल को खेतों में ही चर जा रहे हैं. नेता, कांगे्रस विधान मण्डल दल ने कहा कि छुट््टा जानवरों का इतना आतंक है कि बहुत से किसानों अपने खेतों को परती, बंजर छोंड़ रहे हैं क्योंकि उनकी यह हैसियत नहीं है कि कंटीला तार खरीद कर उनका ‘‘बाड़’’ लगा सके, और मौके की नजाकत को देखते हुये कंटीले तारों की कीमत बाजार में डेढ़- दो गुना कर दी गयी है जिससे किसान अपनी गाढ़ी कमाई से बेटी की पढ़ाई और शादी आदि के लिये संचित पंूूॅजी को कंटीले तार को खरीदने में लगा रहे हैं. छुट््टा जानवरों का इतना ज्यादा आतंक है कि न जाने कितने बुजुर्ग, बच्चे और आम नागरिक इनके हमले से घायल हो रहे हैं और कितने बीमार बुजुर्ग खेतों की रखवाली करते हुये भीषण ठण्ढ से दिल का दौरा पड़ने से अपनी जान गंॅवा बैठे हैं .नेता, कांगे्रस विधान मण्डल दल ने कहा कि सरकार यह सोचकर गहरी नींद मंे सोई है कि यह किसानों का अपना नुकसान है परन्तु वह ये न भूले कि यदि किसानांे की फसल कम होगी तो प्रदेश की ही नहीं बल्कि देष की भारी क्षति होगी, और भारत जैसा कृृषि प्रधान देश इसे सहन नहीं कर पायेगा. सरकार ने अपने बजट में लगभग 300 करोड़ रुपये ‘‘गौषालाओं’’ के लिये रखा था. हमने इसी स्वीकृृति भी दी थी परन्तु मै पूरे दावे से कह रही हंूूॅ कि वह धनराशि जानवरों के भरण पोषण के लिये नहीं पहंुॅच रहीं बल्कि बिचैलिये और दलालों के पेट में जा रही है और बेबष जानवर इधर उधर भटक रहे हैं और उनसे सड़कों पर दुर्घटनायें हो रही है. उत्तर प्रदेश और देश में किसानों की फसल और कृृषि को बचाने के लिये सरकार को युद्ध स्तर पर कदम उठाने होंगे वरना कुछ समय बाद खेत बंजर रह जायेंगे ओर किसानों की आत्म हत्या में और अधिक वृृद्धि होगी.नेता, कांगे्रस विधान मण्डल दल को दलों का बंधन तोड़कर इस प्रकरण पर पूरे सदन ने समर्थन दिया और सरकार को घेरा.